BKTC Hemant Dwivedi on Sara Ali Khan temple entry: उत्तराखंड में 19 अप्रैल 2026 से चारधाम यात्रा की शुरुआत होने वाली है. इसकी तैयारियों को लेकर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) जुटी हुई है. इस बीच अब बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को देहरादून में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने चारधाम यात्रा की तैयारियों, मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश आदि को लेकर कई मुद्दों पर जानकारी दी.
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अब उनकी इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने हेमंत द्विवेदी से मंदिर में गैर सनातनियों के प्रवेश को बैन करने पर सवाल किया. इसका जवाब देते हुए उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जिस पर अब बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस ने इसे धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश बताया है. क्या है पूरा मामला, चलिए विस्तार से जानते हैं इस खबर में…
जानिए प्रेस कॉन्फेंस पूछा गया सवाल?
दरअसल, प्रेस कॉन्फेंस में उनसे सारा अली खान के मंदिर में दर्शन को लेकर सवाल पूछा था. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का स्वरूप अत्यंत विराट है और पूरी दुनिया में इसके अनुयायी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की बाबा केदार और भगवान बद्रीनाथ के प्रति आस्था है, उनका स्वागत है. वो सब सनातनी हैं. उन्होंने आगे कहा कि जो भी व्यक्ति सनातन धर्म में आस्था रखता है, वह सनातन परंपरा का हिस्सा है. अगर सारा अली खान भी कहेंगे कि सनातन धर्म में मेरी आस्था है, मेरा भाव है और हमें मंदिर में प्रवेश के लिए एफिडेविट देती हैं, तो हम उनको भी दर्शन करवा देंगे.
'धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश'- कांग्रेस
अब बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के इस बायन पर कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने हमला बोला है. सुजाता पॉल ने कहा कि ''विनाश काले विपरीत बुद्धि की कहावत आज उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर लागू होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की सोच अहंकार से भरी हुई है और धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने हेमंत द्विवेदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य जो महिलाओं के बलिदान से बना है, वहां किसी महिला या मातृशक्ति की आस्था पर सवाल उठाना गलत है.
सारा अली से एफिडेविट मांगने पर ये कहा
सुजाता पॉल ने सारा अली खान से एफिडेविट मांगने बयान पर कहा कि ये सारा की आस्था, विश्वास और भगवान के साथ उनके निजी संबंधों पर सवाल उठाने जैसा है जो पूरी तरह अनुचित है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आरिफ मोहम्मद खान, मुख्तार अब्बास नकवी या शाहनवाज हुसैन जैसे लोग चारधाम यात्रा पर आएं तो क्या उनसे भी इसी तरह एफिडेविट मांगा जाएगा? उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य धर्म के अधिकारी या आम लोग चारधाम आना चाहें तो क्या उन्हें भी रोका जाएगा? उन्होंने इस तरह की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए इसे गलत और अनुचित बताया.
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