केदारनाथ धाम से अचानक गायब हुआ पवित्र धर्म दंड, मचा हड़कंप…फिर सामने आया ये हैरान करने वाला सच, जानें क्या है पूरा मामला
Kedarnath Dharm Dand Controversy: उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से जुड़े पवित्र धार्मिक प्रतीक धर्म दंड के भंडार गृह से गायब होने की खबर ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. पुरोहितों और श्रद्धालुओं ने जांच की मांग उठाई. अब जांच में सामने आया है कि यह चोरी नहीं हुआ था, उसे धार्मिक कार्यक्रम में ले जाया गया था.

Kedarnath Dharm Dand News: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम से जुड़े पवित्र धार्मिक प्रतीक धर्म दंड (रूप छड़) को लेकर फैली चिंता आखिरकार खत्म हो गई है. दरअसल, धाम के भंडार गृह से इसके चोरी होने की खबर सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया था. मामला सामने आते ही तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं ने इसकी जांच की मांग उठाई. वहीं घटना के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति के पदाधिकारियों की चुप्पी पर भी लगातार सवाल उठ रहे थे. मामला जब सरकार तक पहुंचा तो आनन-फानन में जांच के आदेश दिए गए. हालांकि, अब धर्म दंड का पता लग गया है और वो इस समय सुरक्षित स्थान पर है. ऐसे में आइए जानते हैं कि धर्म दंड क्या होता है, क्या है इसका धार्मिक महत्व और आखिर कहां से ये मिला...
जानिए क्या होता है पवित्र धर्म दंड?
दरअसल, पवित्र धर्म दंड केदारनाथ धाम में विग्रह डोली के साथ चलने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है. यह चांदी से बना दंड होता है, जिस पर धार्मिक प्रतीक और वस्त्र लिपटे रहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह प्रतीक स्वयं बाबा केदार का स्वरूप माना जाता है.
ऐसे पता चली गायब होनी की बात
दरअसल, हाल ही में जब भंडार गृह में रखे गए धार्मिक प्रतीकों की नियमित जांच की गई तो वहां से धर्म दंड गायब मिला. इसके बाद मंदिर प्रशासन और धर्मार्थ विभाग में हड़कंप मच गया. मामले को गंभीर को देखते हुए उत्तराखंड सरकार के धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने जांच के आदेश दे दिए. साथ ही उन्होंने सख्त आपत्ति जताते हुए पूछा है कि इतना महत्वपूर्ण प्रतीक आखिर भंडार से बाहर कैसे गया. महाराज ने कहा कि मंदिर के सभी धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा बीकेटीसी की जिम्मेदारी है.
यह भी पढ़ें...
यहां ले जाया गया था धर्मीक प्रतीक
शुरुआती जांच में पता चला कि केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. इसी कार्यक्रम के लिए धर्म दंड को भी वहां भेजा गया था. बताया जा रहा है कि बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल ने 19 जनवरी 2026 को इसके लिए अनुमति दी थी. हालांकि, जानकारों और पुरोहितों का कहना है कि यह रावल का निजी कार्यक्रम था और केदारनाथ के प्रतीकों को इस तरह राज्य से बाहर ले जाने की कोई परंपरा नहीं है.
जानें क्या है परंपरा और नियम?
मिली जानकारी के अनुसार, इससे पहले साल 2000 में भी इसी तरह धार्मिक प्रतीकों को दक्षिण भारत ले जाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन तब मंदिर समिति ने परंपरा का हवाला देते हुए साफ इनकार कर दिया था. परंपरा के अनुसार कपाट बंद होने के बाद मंदिर के सभी धार्मिक प्रतीकों को बीकेटीसी के भंडार में सुरक्षित रखा जाता है और उन्हें कहीं बाहर नहीं ले जाया जाता.
परंपराओं के उल्लंघन पर उठे सवाल
हालांकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि धर्म दंड चोरी नहीं हुआ बल्कि अनुमति के साथ बाहर ले जाया गया था, लेकिन इतनी महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहर को निजी कार्यक्रम में ले जाने की अनुमति को लेकर विवाद और सवाल अब सवाल खड़े हो गए हैं.
'किसके कहने पर मिली अनुमति'- कांग्रेस
मामले को लेकर कांग्रेस ने भी बीकेटीसी पर सवाल उठाए हैं. पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि चारधाम के धार्मिक प्रतीकों को निजी कार्यक्रमों में ले जाने की कोई परंपरा नहीं है. उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी अनुमति किसके आदेश पर दी गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है. उनका कहना है कि बीकेटीसी नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है.
यह भी पढ़ें: फैन से की शादी, रिश्तों में आई दरार…आखिर क्यों टूट गए UK07 Rider अनुराग डोभाल? जानें पूरी कहानी










