Uttarakhand Char Dham Entry Rules: उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा की शुरुआत होने जा रही है. ऐसे में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं. लेकिन यात्रा की शुरुआत से ठीक पहले ही मंदिर परिसर में गैर हिंदुओं की एंट्री को लेकर विवाद हो खड़ा हो गया है. विवाद की जड़ बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC ) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का एक बयान है, जिसके बाद से ये मामला अब चर्चाआं में है. BKTC के अध्यक्ष के बयान के बाद अब गंगोत्री मंदिर समिति का भी बयान सामने आया है, जिसमें बाद धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर दोनों के आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं.
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दरअसल, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देहरादून में एक प्रेंस कॉन्फेंस में धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर बड़ा बयान दिया था. इस दौरान उन्होंने कहा कि समिति के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में अगर कोई गैर-हिंदू प्रवेश करना चाहता है तो उसे एक एफिडेविट देना होगा. इस एफिडेविट में उस व्यक्ति को सनातन धर्म में अपनी आस्था जतानी होगी. द्विवेदी कहना था कि जो भी सनातन परंपरा में विश्वास रखता है, वो इसका हिस्सा है. ऐसे में एफिडेविट देने के बाद वो दर्शन कर सकता है.
गंगोत्री मंदिर समिति ने जताई असहमति
उधर अब उनके इस प्रस्ताव से गंगोत्री मंदिर समिति ने पूरी तरह किनारा कर लिया है. समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने इसे हेमंत द्विवेदी की व्यक्तिगत राय करार दिया है. उन्होंने कहा कि कि गंगोत्री धाम में प्रवेश के लिए किसी भी तरह के एफिडेविट की जरूरत नहीं होगी. सेमवाल के अनुसार, शास्त्रीय मान्यताओं के तहत यदि कोई गैर-हिंदू पंचगव्य (गौमूत्र, गोबर, गंगाजल, घी और शहद) का सेवन करता है तो उसे शुद्ध माना जाएगा और वह मंदिर में दर्शन कर सकता है.
सेमवाल ने ये भी कहा कि जैन, सिख और बौद्ध धर्म को सनातन परंपरा का हिस्सा मानते हुए उन्हें अलग श्रेणी में नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने येभी साफ किया कि गौमांस का सेवन करने वालों के प्रवेश का कड़ा विरोध किया जाएगा. इसके साथ ही गंगोत्री मंदिर समिति ने इस मुद्दे पर एक विशेष समिति के गठन की भी बात कही है जो यह सुनिश्चित करेगी कि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता (संविधान के अनुच्छेद 25 और 26) का उल्लंघन न हो, साथ ही परंपराओं का पालन भी बना रहे. इस तरह चार धाम यात्रा से पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर अलग-अलग नियमों की चर्चा ने धार्मिक और संवैधानिक बहस को तेज कर दिया है.
सारा अली खान के नाम पर उठा था सवाल
इस पूरे विवाद की जड़ देहरादून में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रही. यहां हेमंत द्विवेदी से अभिनेत्री सारा अली खान के मंदिर दर्शन को लेकर सवाल किया गया था. जवाब में द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म का स्वरूप बहुत विशाल है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सारा अली खान भी ये कहती हैं कि उनकी सनातन धर्म में आस्था है और वह इसके लिए एफिडेविट देती हैं तो उन्हें भी दर्शन करने दिए जाएंगे. उनके इस बयान के बाद ही एफिडेविट को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं.
कांग्रेस ने की थी आलोचना
इस मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है. कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने BKTC अध्यक्ष के बयान की तीखी आलोचना की है. उन्होंने इसे धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश बताया. सुजाता पॉल ने सवाल उठाया कि क्या आरिफ मोहम्मद खान या मुख्तार अब्बास नकवी जैसे कद के लोग अगर यात्रा पर आएंगे तो उनसे भी एफिडेविट मांगा जाएगा? उन्होंने इसे किसी व्यक्ति की आस्था और भगवान के साथ उसके निजी संबंधों पर सवाल उठाने जैसा बताया और इसे अनुचित करार दिया.
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