उत्तराखंड: हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद पर मकान के सौदे में धोखाधड़ी के आरोप, दिव्यांग शख्स ने बताई आपबीती

अंकित शर्मा

• 04:16 PM • 02 Nov 2026

Harak Singh Rawat: उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद पर मकान के सौदे में धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं. देहरादून के दिव्यांग शिकायतकर्ता हरिओम सहगल का दावा है कि 56 लाख रुपये में मकान बेचने के बाद उन्हें पूरी रकम नहीं मिली. मामला अब SSP तक पहुंचा है, जिन्होंने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं.

Harak Singh Rawat
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उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत और उनकी कथित पत्नी सोनिया आनंद रावत (जसबीर कौर आनंद) पर संपत्ति के लेन-देन में धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं. देहरादून के रहने वाले पीड़ित हरिओम सहगल का कहना है कि उन्होंने साल 2021 में अपना मकान बेचा था, लेकिन सौदा पूरा होने के बाद भी उन्हें तय रकम का बड़ा हिस्सा नहीं मिला. इस पूरे मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

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दोनों हाथ गंवा चुके पीड़ित की दर्दभरी दास्तान

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात पीड़ित हरिओम सहगल की शारीरिक स्थिति है. हरिओम दिव्यांग हैं और उनके दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वे पिछले कई सालों से अपने हक और इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं. उनका कहना है कि आज उनके पास पहचान के तौर पर केवल आधार कार्ड बचा है और वे पूरी तरह बेघर होकर जिंदगी काटने को मजबूर हैं. उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा कि आम जनता के वोट से मंत्री बनते हैं, लेकिन वही रसूखदार लोग बाद में गरीबों की सांसें भारी कर देते हैं.

पीड़ित ने क्या बताया?

पीड़ित के मुताबिक, साल 2021 में उन्होंने अपने मकान का सौदा सोनिया आनंद के साथ 56 लाख रुपये में किया था. बताया जा रहा ह कि उस वक्त उस संपत्ति की बाज़ार कीमत 2 करोड़ रुपये से ज्यादा थी और सरकारी कागजों के हिसाब से भी उसका मूल्य 1.25 करोड़ रुपये से अधिक था. हरिओम का आरोप है कि सौदा तय होने के बाद उन्हें दो किस्तों में कुल मिलाकर सिर्फ 12 लाख 80 हजार रुपये ही दिए गए. बाकी बचे पैसे देने के नाम पर जो चेक थमाए गए, वे बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए और बकाया रकम आज तक नहीं मिली. 

महाराष्ट्र में केस फिर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

चेक बाउंस होने के बाद जब पीड़ित ने कानूनी नोटिस भेजा तो वह बिना मिले ही वापस आ गया. इसके बाद हरिओम सहगल को इंसाफ पाने के लिए महाराष्ट्र के नासिक जिले (त्र्यंबकेश्वर) की अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा. लगातार कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने से उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी. मामला यही नहीं थमा, साल 2024 में इस केस को देहरादून की अदालत में ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक अर्जी लगानी पड़ी. इसके अलावा रजिस्ट्री से जुड़े दीवानी मुकदमों में भी तीन बार एकतरफा फैसले हो चुके हैं.

वन भूमि पर कब्जे का सनसनीखेज दावा

शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी अर्जी में यह भी आरोप लगाया है कि साल 2022 में उन्हें उनके ही घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया और मकान पर ताला जड़ दिया गया. पीड़ित का यह भी दावा है कि वर्ष 2018 में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने जिस मकान को सील किया था, उसकी सील भी बिना किसी अनुमति के तोड़ दी गई. इतना ही नहीं, पास की वन भूमि और गुर्जर समाज की जमीन पर दबाव बनाकर कब्जा करने और यूनिवर्सिटी रोड तक जाने का रास्ता बनाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं.

फर्जी कागजात और खातों की जांच की उठी मांग

अपनी शिकायत में हरिओम सहगल ने आरोप लगाया है कि आरोपी पक्ष अलग-अलग नामों से कई बैंक खाते संचालित कर रहा है. उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सोनिया आनंद के वैवाहिक कागजात, पहचान पत्र और बैंक खातों के साथ-साथ अदालत में दिए गए मेडिकल सर्टिफिकेट की भी गहनता से सरकारी जांच कराई जाए. पीड़ित का कहना है कि सुनवाई से बचने के लिए फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तक बनाई गई थी, जिसे बाद में अदालत ने खारिज कर दिया था.

एसएसपी ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

मामले का संज्ञान लेते हुए देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने पूरी जांच का जिम्मा एसपी सिटी को सौंप दिया है. पुलिस कप्तान ने साफ शब्दों में कहा है कि दिव्यांग शिकायतकर्ता के आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिया कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. एसएसपी ने यह भी दोहराया कि आरोपी का राजनीतिक रसूख चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून सबके लिए एक समान है.

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