Umesh Kumar Khanpur Independent MLA: खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वे कल अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के गंभीर मुद्दों और किसानों के हक की लड़ाई को लेकर वे लगातार सदन में आवाज उठाते रहे हैं. उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष उनके इन जनहित के मुद्दों पर साथ खड़ा होगा और उनका समर्थन करेगा, लेकिन उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी.
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विपक्ष को लेकर कही ये बात
उमेश कुमार ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अपना दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि बीते साढ़े चार साल के लंबे कार्यकाल में एक भी ऐसा दिन नहीं आया जब विपक्ष सदन के भीतर उनके साथ मजबूती से खड़ा हुआ हो. विधायक ने कहा कि विपक्ष हर बड़े मुद्दे पर, चाहे सदन के अंदर धरने पर बैठना हो या फिर रात के समय सदन के वेल में सोकर विरोध दर्ज कराना हो वे हमेशा विपक्ष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे. इसके बावजूद जब किसानों और आम जनता के हक में आवाज उठाने की बारी आई तो विपक्ष ने उनका साथ बिल्कुल नहीं दिया.
किसानों के बकाया भुगतान पर क्या बोले?
अपने बयान में निर्दलीय विधायक ने किसानों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए बेहद गंभीर बातें सामने रखीं. उन्होंने इकबालपुर शुगर मिल का मुद्दा उठाया, जहां वर्ष 2018 से किसानों का लगभग 120 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अटका हुआ है. उचित समय पर भुगतान न मिलने और पैसों की तंगी के कारण इलाज के अभाव में कई बेबस किसानों की मौत तक हो गई. इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2023 में हरिद्वार जनपद में आई भयानक बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि फसलें पूरी तरह बर्बाद होने के बाद भी किसानों की आरसी काटी गई. किसान क्रेडिट कार्ड के ब्याज से जुड़ी समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया.
'हर नागरिक को बेहतर और पक्की सड़कें का अधिकार'
खानपुर विधायक ने कहा कि राज्य के हर नागरिक को बेहतर और पक्की सड़कें, पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं पाने का अधिकार है. इसके साथ ही बढ़ती बेरोजगारी भी प्रदेश का एक बेहद गंभीर मुद्दा बनी हुई है. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि विडंबना यह है कि विपक्ष इन तमाम जरूरी मुद्दों को जुबानी तौर पर उठाता तो जरूर है, लेकिन जब सदन के पटल पर इन पर मजबूती से लड़ने के लिए कोई अकेला खड़ा होता है तो विपक्ष उसका साथ देने के बजाय पीछे हट जाता है.
दोनों प्रमुख दलों से दूरी का ऐलान
उमेश कुमार ने कहा कि वे किसी दल के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वे न तो कांग्रेस में जाकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के समर्थन में नारेबाजी कर सकते हैं और न ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जिंदाबाद के नारे लगा सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे न भाजपा में जाएंगे और न ही कांग्रेस का दामन थामेंगे. उन्होंने अपनी आगे की योजना बताते हुए कहा कि वे आगे ऐसा प्रयास करेंगे कि अगली बार उनके साथ कुछ और साथी आएं, जिससे कि किसानों की लड़ाई को और अधिक मजबूती के साथ उठाया जा सके.
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