उत्तराखंड की राजनीति में आज का दिन काफी अहम रहा क्योंकि पिछले 2 साल के इंतजार के बाद अब धामी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो ही गया है. देहरादून में 20 मार्च को सुबह 10 बजे इस मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया, जिसमें 5 बड़े नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. यह विस्तार इसलिए भी अहम है क्योंकि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने है और ऐसे में धामी ने इन सीटों को भरकर शासन को रफ्तार देने की कोशिश की है. आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं ये 5 मंत्री, क्या है उनका बैकग्राउंड के साथ-साथ क्यों मिली इन मंत्रियों को जगह.
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क्यों किया गया विस्तार?
दरअसल धामी सरकार के कैबिनेट में कुल 12 मंत्री हो सकते है, लेकिन फिलहाल इसमें 7 ही मंत्री थे. सरकार में तीन पद पहले से ही खाली थे, फिर 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के आकस्मिक निधन के बाद एक और सीट खाली हो गया. उसके बाद प्रेम चंद्र अग्रवाल के इस्तीफे के बाद से ही पांच पद खाली चल रहे थे.
किन विधायकों को मिली जगह?
बताया जा रहा है कि धामी सरकार ने आगामी चुनाव को देखते हुए इस मंत्रिमंडल के विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा है. इन मंत्रियों में खजान दास, राम सिंह कैड़ा, मदन कौशिक, भारत चौधरी और प्रदीप बत्रा का नाम शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन मंत्रियों को चुनने के पीछे विधायकों द्वारा किए गए 4 साल का काम है.
1. खजान दास( राजपुर विधायक)- खजान दास उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा चेहरा माना जाता है. साल 2007 में उन्होंने सबसे पहली बार धनौल्टी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. साल 2022 के चुनाव में भी खजानदास ने अपना परचम लहराया और राजपुर रोड से कांग्रेस उम्मीदवार को 11,163 वोटों से हराया. खजान दास दलित समाज से आते है और पहले भी कैबिनेट मंत्री रहे है. इसके अलावा पार्टी में भी कई बड़े पदों पर रहें है.
2. भारत चौधरी(रुद्रप्रयाग विधायक)- 66 साल के भरत सिंह चौधरी रुद्रप्रयाग से लगातर दो बार विधायक का चुनाव जीत चुके है. भरत चौधरी ठाकुर समाज से आते है और उनकी हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत में अच्छी पकड़ है. उन्हें चुनने के पीछे लगातार दो बार जीत और साफ छवि बताया जा रहा है.
3. राम सिंह कैड़ा(भीमताल विधायक)- राम सिंह कैड़ा ने अपनी राजनीतिक शुरुआत छात्र राजनीति से की और बाद में कांग्रेस से जुड़े, जहां उन्होंने कई अहम पद संभाले. 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत कर भीमताल सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. विधायक बनने के बाद उन्होंने भाजपा सरकार के साथ तालमेल बनाकर काम किया और लगातार भाजपा के करीब नजर आए. 2022 चुनाव से पहले उनकी भाजपा में जाने की चर्चाएं तेज हुईं और आखिरकार अक्टूबर 2021 में उन्होंने आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.
4. मदन कौशिक(हरिद्वार विधायक)- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन कौशिक उत्तराखंड की राजनीति के एक प्रमुख और अनुभवी चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. कौशिक ब्राह्मण समाज से आते हैं. वह भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और हरिद्वार विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं. राज्य सरकार में उन्होंने लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और विभिन्न अवधियों में त्रिवेंद्र सिंह रावत, भुवन चंद्र खंडूरी और डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के नेतृत्व वाली सरकारों में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया. इसके अलावा वे उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
मदन कौशिक पहली बार वर्ष 2002 में विधायक बने थे, जिसके बाद 2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की. 2017 के चुनाव में उन्होंने 37 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल किया था, जबकि 2022 के चुनाव में भी उन्होंने 15 हजार से अधिक वोट से जीत दर्ज कर अपना पांचवीं बार विधायक बने.
5. प्रदीप बत्रा(रुड़की विधायक)- 52 साल के प्रदीप बत्रा भी प्रदेश की राजनीति में जाना-माना चेहरा है. वे पेशे से व्यवसायी है और होटल, दुकान के साथ-साथ कंपनी कारोबार से जुड़े हुए है. प्रदीप कांग्रसे के टिकट पर रुड़की सीट से 2012 और 2017 में विधायक चुने जा चुके हैं. साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और चुनाव में जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार विधायक बने. लगातार जीत और क्षेत्र में मजबूत पकड़ के चलते अब उन्हें धामी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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