लालू, तेजस्वी, हेमंत, केजरीवाल, संजय राउत… क्या विपक्ष के नेताओं को निशाना बना रही ED?

अभिषेक गुप्ता

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Enforcement Directorate: देश की राजनीति में इस समय इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (ED) की खूब चर्चा है. विपक्ष के कई कद्दावर नेता ED के निशाने पर नजर आ रहे हैं. पहले बिहार में लालू यादव से 10 घंटे पूछताछ हुई. फिर उनके बेटे तेजस्वी यादव को ईडी ने 9 घंटे तक पूछताछ में बिठाया. फिर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के आवास पर रेड मार गाड़ी और कैश जब्त किया. चर्चा चली की हेमंत गिरफ्तार हो जाएंगे. बीजेपी ने कहा कि हेमंत भूमिगत हैं. हालांकि झारखंड सीएम रांची में अपने पार्टी के बैठक में दिखे और अपने ऊपर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया. इसी बीच बारी आई महाराष्ट्र की भी. शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेता संजय राउत के भाई संदीप राउत से भी मंगलवार को ED ने पूछताछ की. ये सारे नेता विपक्ष के इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं. बीते दिनों बिहार के सीएम नीतीश कुमार इस गठबंधन को ज्यों छोड़कर बाहर आए, अचानक से ED के एक्शन का शोर मच गया. क्या सिर्फ विपक्ष के नेता ED के निशाने पर हैं? ये सवाल खड़ा होने लगा है.

कांग्रेस के नेतृत्व में बने इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) में शामिल विपक्षी नेताओं और ED के बीच एक खास कनेक्शन जैसा दिख रहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हों या झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार और उनके पोते रोहित पवार सभी पर हाल के समय में ED का शिकंजा तेजी से कसता दिखा है.

विपक्ष के बड़े नेताओं पर लटकी है गिरफ्तारी की भी तलवार

लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है. इस बाबत विपक्षी दल बीजेपी की सरकार पर लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि, उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. वैसे आपको बता दें कि, झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने तो ED के 10 समन को नजरंदाज किया है, जिससे अब ED उनके घर पर छापेमारी कर रही है. माना ये जा रहा है कि, ED किसी भी वक्त उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. दिल्ली सीएम केजरीवाल भी ED के चार समन को नजरंदाज कर चुके हैं. उनकी भी पार्टी की तरफ से बार-बार ये कहा जा रहा है कि, लोकसभा चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है. बिहार में लालू यादव और तेजस्वी यादव पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है.

ED के घेरे में विपक्ष के नेता

क्या सच में विपक्ष को निशाना बना रही ED?

विपक्ष केन्द्रीय जांच एजेंसी ED पर ये आरोप लगाता रहा है कि, ED केंद्र सरकार के इशारों पर विपक्ष के नेताओं पर कार्रवाई कर रही है. इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से यानी जबसे केंद्र में बीजेपी और नरेंद्र मोदी की सत्ता आई है, तबसे ED ने कुल 121 केस दर्ज किए हैं. इन 121 में से 115 केस विपक्षी नेताओं पर तो सिर्फ 6 केस बीजेपी के नेताओं पर लगे हैं.

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विपक्ष पर ईडी के केस
विपक्ष पर ED के केस

इससे ये साफ है कि 90 फीसदी से ज्यादा केस विपक्ष के नेताओं पर ही दर्ज हुए हैं. वहीं अगर 2004 से 2014 तक की कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार की बात करें तो, इस दौरान ED ने कुल 19 मामले दर्ज किए. 15 विपक्ष पर और 5 कांग्रेस के नेताओं पर. यानी तब भी विपक्ष पर केस ज्यादा ही थे. हालांकि तब केस बहुत कम थे, लेकिन अब विपक्ष पर दर्ज मामलों की संख्या बहुत ज्यादा है.

इन सभी बातों के बीच बीजेपी और केंद्र सरकार का ये कहना है कि, जांच एजेंसियां स्वतंत्र है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं. पर ED की लंबी लिस्ट में विपक्षी नेताओं के नामों की संख्या विपक्ष को यह कहने का आधार जरूर दे रही है कि क्या जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है?

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