सुरिंदर चौधरी बने जम्मू-कश्मीर के डिप्टी CM, 10 साल पहले जिनसे हुई अदावत उन्हें ही हराकर इस मुकाम पर पहुंचे
नेशनल कॉन्फ्रेस जॉइन करने से पहले सुरिंदर चौधरी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) में थे. वहां उन्होंने महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में राजनीति की. उन्होंने साल 2014 में नौशेरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. लेकिन उस समय वे रवींद्र रैना से 10,000 वोटों से हार गए.
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Surinder Chaudhary: जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का गठन हो गया है. उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके नेतृत्व में 6 विधायकों ने मंत्री पद ग्रहण किया. इस नई सरकार में सुरिंदर चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया है, जो उमर अब्दुल्ला की पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक हैं.
कौन हैं सुरिंदर चौधरी?
सुरिंदर चौधरी को 'जायंट किलर' के नाम से भी जाना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जम्मू-कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना को हराकर चुनाव जीता. यह जीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले रवींद्र रैना का इस क्षेत्र में दबदबा था.
PDP से NC तक का सफर
सुरिंदर चौधरी पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) में थे. वहां उन्होंने महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में राजनीति की. उन्होंने साल 2014 में नौशेरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. लेकिन उस समय वे रवींद्र रैना से 10,000 वोटों से हार गए. उस चुनाव के दौरान रवींद्र और सुरिंदर के बीच टकराव की भी खबर सामने आईं. इस बार के चुनाव में सुरिंदर ने 7,819 वोटों के अंतर से रवींद्र रैना को हराकर अपनी जीत दर्ज की.
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सुरिंदर चौधरी की संपत्ति और पढ़ाई
चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुरिंदर चौधरी के पास लगभग 2.3 करोड़ रुपए की संपत्ति है. उनकी आय के प्रमुख स्रोत विधायक पेंशन और मकान का किराया हैं. उन्होंने 1987 में जम्मू-कश्मीर राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास की थी.
उमर सरकार में कौन-कौन बने मंत्री?
नई सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 6 विधायकों ने शपथ ली है. सुरिंदर चौधरी को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है. जबकि अन्य मंत्रियों में एनसी कोटे से सकीना इटू, जावेद राणा और जावेद अहमद डार शामिल हैं. इसके अलावा, निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है.
उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई सरकार से राज्य की जनता को काफी उम्मीदें हैं. सुरिंदर चौधरी की उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति उनकी प्रभावशाली जीत और राजनीतिक अनुभव को दर्शाती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई सरकार जम्मू-कश्मीर में विकास और शांति की दिशा में क्या कदम उठाएगी.