दो साल में वाजपेयी, देवेगौड़ा और गुजराल देश को मिले थे 3 प्रधानमंत्री, कहानी उस दौर की जब किसी को नहीं मिला था बहुमत
1996 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
ADVERTISEMENT

Indian Politics Of 1990s: 1990 का दौर भारत के सियासत में एक बड़े उथल-पुथल वाला दौर था. एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई थी देश के भुगतान संतुलन का खतरा मंडरा रहा था यानी भारत विदेश से कोई भी सामान इंपोर्ट करने कि स्थिति में नहीं था. दूसरी तरफ केंद्र में गठबंधन की अस्थिर सरकार थी. सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के कमजोर होने के बाद से ही विपक्षी पार्टियों ने गठबंधन की राजनीति शुरू कर दी थी. 1991 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद पी. वी. नरसिम्हा राव पीएम बने जिन्होंने पूरे पांच साल तक गठबंधन की सरकार चलाई. 1996 आते-आते वोटरों का भरोसा सभी पार्टियों से उठने लगा और इसका असर चुनावी नतीजों पर भी दिखा. 1996 के लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी वहीं कांग्रेस सिर्फ 140 सीटों पर सिमट गई. आइए हम आपको बताते हैं गठबंधन के इस दौर में कैसी थी देश की सियासत.