Kharmas 2026: आज रात से लग रहा है ब्रेक, एक महीने तक शुभ कार्यों पर पाबंदी, भूलकर भी न करें ये गलतियां
न्यूज तक डेस्क
• 12:37 PM • 14 Mar 2026
आज रात 1:08 बजे से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास शुरू हो रहा है जो 14 अप्रैल तक सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लगाएगा. इस एक महीने की अवधि में शादी-ब्याह और गृह प्रवेश जैसे कार्य वर्जित रहेंगे, हालांकि आध्यात्मिक उन्नति और दान-पुण्य के लिए यह समय श्रेष्ठ माना जाता है.
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अगर आप आने वाले दिनों में शादी-ब्याह, सगाई या नए घर में गृह प्रवेश की योजना बना रहे हैं, तो अपनी डायरी में आज की तारीख को खास तौर पर नोट कर लीजिए. हिंदू पंचांग के अनुसार, आज यानी 14 मार्च की रात से 'खरमास' की शुरुआत हो रही है. यह एक ऐसी अवधि है जिसे ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है. अगले एक महीने तक अब शहनाइयों की गूंज सुनाई नहीं देगी और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग जाएगा.


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ज्योतिष गणनाओं के मुताबिक, इस साल सूर्य देव आज रात ठीक 1 बजकर 8 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के मीन राशि में जाते ही 'मीन संक्रांति' शुरू हो जाएगी, जिसे आम बोलचाल में खरमास कहा जाता है. यह समय 14 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा, जब तक सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर अपनी उच्च स्थिति में नहीं आ जाते. इस दौरान सूर्य का प्रभाव देवगुरु बृहस्पति की राशि में होने के कारण शुभ कार्यों के लिए इसे अनुकूल नहीं माना जाता.
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धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं की मानें तो खरमास के दौरान सूर्य का तेज और प्रभाव कुछ कम हो जाता है. चूंकि किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता के लिए सूर्य और गुरु का बलवान होना अनिवार्य है, इसलिए इस एक महीने में किए गए कार्यों में बाधाएं आने की आशंका बनी रहती है. यही वजह है कि हिंदू धर्म को मानने वाले लोग इस दौरान विवाह, मुंडन, नामकरण और यज्ञोपवीत जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों को करने से परहेज करते हैं.


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खरमास की इस अवधि में केवल संस्कारों पर ही नहीं, बल्कि नई संपत्तियों और निवेश पर भी पाबंदी रहती है. ज्योतिषियों की सलाह है कि इस दौरान नया वाहन खरीदना, भूमि पूजन करना या नए व्यापार की नींव रखना शुभ नहीं होता. यहां तक कि सोने-चांदी के बड़े निवेश या गहनों की खरीदारी को भी इस समय टाल देना ही बेहतर माना जाता है. माना जाता है कि इस समय किया गया निवेश भविष्य में उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं देता.
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भले ही इस समय शुभ कार्यों पर रोक लगी हो, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति और दान-पुण्य के लिए यह महीना किसी वरदान से कम नहीं है. खरमास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है. इस दौरान नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देना, गीता का पाठ करना और पवित्र नदियों में स्नान करना व्यक्ति के संचित पापों का नाश करता है. विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए किया गया तर्पण इस अवधि में अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है.


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यह समझना जरूरी है कि खरमास का अर्थ केवल 'काम का रुकना' नहीं, बल्कि 'चिंतन और सेवा' का समय है. इस महीने में जरूरतमंदों को अनाज, गुड़, वस्त्र और शीतल जल का दान करना समाज और व्यक्ति दोनों के लिए कल्याणकारी है. तो अब 14 अप्रैल तक संयम रखें और भक्ति में लीन रहें, क्योंकि जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, एक बार फिर से खुशियों और उत्सवों का दौर लौट आएगा.
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