केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. आयोग ने आधिकारिक तौर पर कर्मचारी संघों और विभिन्न एसोसिएशनों के साथ परामर्श (Consultation) की प्रक्रिया शुरू कर दी है. दिल्ली में 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक बैठकों का पहला दौर निर्धारित किया गया था और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बैठक शुरू हो गई है.
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सभी संघों को नहीं मिल पाया समय
चूंकि बैठक के लिए उम्मीद से कहीं अधिक आवेदन मिलने के कारण आयोग के सामने समय की चुनौती खड़ी हो गई थी. 24 अप्रैल 2026 को जारी एक आधिकारिक नोटिस में आयोग ने स्वीकार किया कि बातचीत के लिए "बड़ी संख्या में अनुरोध" प्राप्त हुए हैं. समय की कमी के चलते फिलहाल सभी संगठनों को पहले दौर में शामिल करना संभव नहीं हो पा रहा है.
8वें वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-NCR के बाहर के हितधारकों को थोड़ा इंतजार करना होगा, क्योंकि आने वाले महीनों में टीम अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर जमीनी स्तर पर सुझाव लेगी. इसी कड़ी में 24 अप्रैल को एक टीम ने देहरादून का दौरा भी किया था.
72,000 रुपए न्यूनतम वेतन: सच या सिर्फ अफवाह?
सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि न्यूनतम वेतन 72,000 रुपए तय हो सकता है. हालांकि, सच्चाई इससे थोड़ी अलग है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 72,000 रुपए का आंकड़ा किसी भी औपचारिक प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है. यह केवल अलग-अलग 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) के आधार पर लगाए जा रहे अनुमानों का नतीजा है.
क्या है आधिकारिक प्रस्ताव?
अब तक रिकॉर्ड पर मौजूद एकमात्र व्यवस्थित प्रस्ताव राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की ओर से आया है. कर्मचारी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले इस निकाय ने अपने ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखी हैं-
- न्यूनतम मूल वेतन: 69,000 रुपए महीने का प्रस्ताव.
- फिटमेंट फैक्टर: 3.83 के फैक्टर की सिफारिश.
जेसीएम (JCM) की स्टाफ साइड की महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा चुका है. नेशनल काउंसिल (JCM) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने News Tak से बातचीत में बताया कि कर्मचारी यूनियनों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर पूर्ण सहमति बन गई है.
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