EPFO News: देश के संगठित क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के केंद्र सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है. मोदी कैबिनेट ने कर्मचारियों के हित में फैसला लेते हुए EPFO के तहत अधिकतम वेतन सीमा (Wage Ceiling) को बढ़ा दिया है. अभी तक ये 15000 रुपए महीने था जिसमें अब 25,000 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की तरफ से मिली इस मंजूरी के बाद देश भर के लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को सीधे तौर पर ईपीएफओ कवरेज के दायरे में लाया जा सकेगा. सबसे बड़ी बात ये है कि वेतन की सीमा बढ़ने के बाद पेंशन , प्रोविडेंट फंड और बीमा सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा. इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने वाली है.
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12 साल बाद बदला गया दायरा
ईपीएफओ की वेतन सीमा में इससे पहले सितंबर 2014 में संशोधन किया गया था, जब इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था. पिछले 12 वर्षों (2014 से 2026) के दौरान देश में औसतन वेतन वृद्धि, बढ़ती आय और कई राज्यों में न्यूनतम वेतन में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. अब तक जो नए कर्मचारी 15,000 रुपये से अधिक के शुरुआती वेतन पर नौकरी में शामिल होते थे, वे अनिवार्य पीएफ और पेंशन सुरक्षा के दायरे से बाहर रह जाते थे. 25,000 रुपये की नई सीमा से इस वेतन वर्ग के लाखों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा.
तीन प्रमुख योजनाओं का मिलेगा पूरा लाभ
इस फैसले के लागू होने से 15,000 से 25,000 रुपये के वेतन बैंड में आने वाले कर्मचारियों को ईपीएफओ द्वारा संचालित तीनों प्रमुख योजनाओं का लाभ मिलेगा-
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): रिटायरमेंट के लिए बड़ी बचत का माध्यम.
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS): सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन की गारंटी.
कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI): पीएफ खाते से जुड़ी बीमा सुरक्षा.
सरकारी खजाने पर पड़ेगा 56,696 करोड़ रुपये का बोझ
इस प्रस्ताव को 16 जून 2026 को हुई व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) की बैठक में हरी झंडी दी गई थी. इस फैसले के लागू होने से सरकार का वार्षिक बजटीय खर्च मौजूदा 10,250 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा. अगले 5 वर्षों में सरकार इस मद में कुल मिलाकर लगभग 56,696 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
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अभी 82 लाख से अधिक पेंशन भोगी
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, ईपीएफओ के पास फिलहाल लगभग 7.98 करोड़ अंशदान करने वाले सदस्य (Contributing Members) और 82 लाख से अधिक पेंशनभोगी हैं. सरकार का मानना है कि इस सीमा को बढ़ाने से न केवल कर्मचारियों को सुरक्षित भविष्य मिलेगा, बल्कि कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए भी कुशल कर्मचारियों को अपने साथ बनाए रखना (Employee Retention) और कार्यबल को मजबूत करना आसान होगा. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और ईपीएफओ जल्द ही इसे लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक और प्रशासनिक अधिसूचनाएं जारी करेंगे.
Q&A
Q1: ईपीएफओ (EPFO) की नई वेतन सीमा (Wage Ceiling) क्या तय की गई है?
उत्तर: ईपीएफओ की mandatory कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है.
Q2: इस फैसले से कितने नए कर्मचारियों को फायदा होगा?
उत्तर: इस सीमा में बढ़ोतरी होने से देश भर के लगभग 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज मिलेगा.
Q3: इस फैसले से कर्मचारियों को कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ मिलेगा?
उत्तर: नए दायरे में आने वाले कर्मचारियों को ईपीएफओ की तीन प्रमुख योजनाओं - कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) का लाभ मिलेगा.
Q4: इससे पहले ईपीएफओ की वेतन सीमा कब बढ़ाई गई थी?
उत्तर: इससे पहले सितंबर 2014 में ईपीएफओ की वेतन सीमा को संशोधित करके 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था.
Q5: इस योजना के क्रियान्वयन पर सरकार को कितना खर्च करना होगा?
उत्तर: इस निर्णय से सरकार का वार्षिक बजटीय खर्च बढ़कर लगभग 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा. अगले 5 वर्षों में इस पर कुल अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये आएगा.
तो क्या पेंशन की रकम बढ़ेगी ?
यदि कोई व्यक्ति 22 साल की उम्र में ही नौकरी करने लगता है और रिटायर हो जाता है तो उसे अधिकतम 7500 रुपए महीने की पेंशन बनती थी. अब 25000 की वेज सीलिंग पर मंथली पेंशन 12000 रुपए से भी ज्यादा होगी. हां एक बात जरूर है कि सैलरी से पेंशन और पीएफ कंट्रीब्यूशन बढ़ जाएगा. इसका फायदा रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त राशि पर भी पड़ेगा.
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