Satya Niketan PG Collapse News: दिल्ली में 6 सितंबर को सत्यनिकेतन इलाके में एक पांच मंजिला PG की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया था. इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें से ज्यादातर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे. हालांकि, इस खौफनाक हादसे में कुछ छात्रों की किस्मत अच्छी रही और वे मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकल आए. इन्हीं में से एक हैं जम्मू के रहने वाले नितीश चिब, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज (इवनिंग) में बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र हैं. नई दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर से सकुशल डिस्चार्ज होने के बाद नितीश चिब और उनकी मां सीमा ने हादसों के उस काले दिन की पूरी दास्तान साझा की है.
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'दीवार से पानी बहने की आवाज आई और सब ढह गया'
हादसे के समय के मंजर को याद करते हुए नितीश ने बताया कि 6 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच वे अपने दोस्त नीरज के कमरे (201 नंबर) में बैठकर खाना खा रहे थे. तभी अचानक बगल की दीवार से पानी बहने जैसी आवाज आई और इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, पूरी की पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई. नितीश इमारत की दूसरी मंजिल पर रहते थे, जहां इमारत ढहने के तुरंत बाद वे और उनका दोस्त मलबे के नीचे दब गए.
मलबे में 1 घंटा: मोबाइल लोकेशन ने बचाई जान
नितीश ने बताया कि वे करीब 1 घंटे तक मलबे के नीचे दबे रहे, सिर से तेज खून बह रहा था और शरीर पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका था. नितीश का फोन अपने कमरे में रह गया था, लेकिन उनके दोस्त के पास मोबाइल मौजूद था. मलबे में दबे-दबे ही दोस्त ने सीनियर्स और साथियों को अपनी लोकेशन भेजी. इसके बाद सीनियर्स की सूचना पर पहुंची NDRF की टीम ने करीब एक से डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला. नितीश ने यह भी बताया कि मलबे में फंसे होने के दौरान बाहर मौजूद लोग चिल्ला रहे थे कि पीछे की इमारत भी गिर सकती है, जिससे एक पल के लिए उन्हें लगा था कि अब बचना नामुमकिन है.
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₹15,000 रेंट के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी
नितीश ने पीजी प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए बताया कि वे उस कमरे का ₹15,000 प्रति महीना रेंट देते थे, लेकिन सुरक्षा के मानकों का कोई पालन नहीं किया जा रहा था. इमारत में आने-जाने का केवल एक ही संकरा रास्ता था और आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई फायर एक्सटिंग्विशर भी नहीं लगाया गया था. इसके अलावा बेसमेंट में पिछले 1-2 हफ्ते से खुदाई का काम चल रहा था, लेकिन पीजी मालिक ने छात्रों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी थी और उन्हें अंधेरे में रखा गया था.
छात्रों के लिए हॉस्टल और पीजी वेरिफिकेशन की मांग
अस्पताल में इलाज के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी नितीश से मुलाकात की थी और हाल-चाल जाना था. नितीश और उनकी मां ने सरकार से अपील की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल की व्यवस्था की जाए ताकि उन्हें महंगे और असुरक्षित पीजी में न रहना पड़े. साथ ही उन्होंने मांग की है कि दिल्ली के सभी पीजी का स्ट्रक्चरल और सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले पीजी मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
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