इंदौर: मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. खातेगांव थाने के टीआई दिलीप पुरी, जो अपनी बहादुरी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे, उन्हें अवैध शराब के तस्करों ने एक ट्रक से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया. इस घटना ने एक बार फिर से कानून के रखवालों की सुरक्षा और माफियाओं के बढ़ते हौसलों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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ओमेक्स सिटी का वह मंजर, जिसने सबको रुला दिया
हादसे के बाद टीआई दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर जब इंदौर स्थित उनके ओमेक्स सिटी निवास पर पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा. घर के दरवाजे पर गाड़ी रुकते ही पूरी कॉलोनी आंसुओं के समंदर में डूब गई.
शव से लिपटकर उनकी पत्नी का विलाप सुन वहां खड़े बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी भी खुद को नहीं रोक पाए. इस अंतिम विदाई में पूर्व एसपी पुनीत गहलोत, कलेक्टर नेहा मीणा समेत कई दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे.
क्यों शहीद टीआई दिलीप पुरी के पार्थिव शरीर को दफनाया गया, क्या है इसके पीछे की वजह ?
जब नक्सलियों के सामने चट्टान बनने वाला कमांडर बच्चों की तरह फफक पड़ा
इस पूरी घटना का सबसे मार्मिक और भावुक पहलू वह था, जब देवास के पूर्व एसपी (हाल ही में स्थानांतरित) पुनीत गहलोत अपने जांबाज अफसर का शव देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और बच्चों की तरह फूट-फूटकर रो पड़े.
पुनीत गहलोत वही जांबाज आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने नवंबर 2022 में बालाघाट में हॉक फोर्स कमांडेंट रहते हुए 49 लाख के इनामी दो दुर्दांत नक्सलियों को मार गिराया था. इसी अदम्य साहस के लिए उन्हें 14 अगस्त 2024 को प्रतिष्ठित वीरता पदक (Gallantry Award) से सम्मानित किया गया था. जो अधिकारी नक्सलियों के सामने चट्टान की तरह खड़ा रहता है, आज उसने जब अपने प्रिय थानेदार का ठंडा पड़ चुका शरीर देखा, तो एक कमांडर का कलेजा टूट गया. यह आंसू सिर्फ एक अफसर के नहीं, बल्कि एक लीडर का अपने भरोसेमंद सिपाही के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण थे.
इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक निवास, धार जिले के सरदारपुर रवाना किया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई.
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कैसे रची गई खाकी को रौंदने की साजिश?
खातेगांव इलाके में इन दिनों शराब माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर हैं. पुलिस को सूचना मिली थी कि अवैध शराब का एक बड़ा जखीरा ट्रकों के जरिए गुजरने वाला है. कानून का राज कायम रखने के लिए टीआई दिलीप पुरी बिना एक पल गंवाए अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और नाकाबंदी कर दी. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तस्करों के सामने दीवार बनने की कोशिश की. लेकिन कानून के खौफ से बेखौफ हो चुके शराब माफियाओं के सिर पर खून सवार था. तस्करों ने ट्रक रोकने के बजाय उसकी रफ्तार बढ़ाई और सीधे टीआई दिलीप पुरी के ऊपर चढ़ा दिया. इस भयानक हमले में टीआई दिलीप पुरी मौके पर ही शहीद हो गए.
सवालों के घेरे में सुरक्षा और माफियाओं के हौसले
एक ईमानदार पुलिस अधिकारी का इस तरह से बेरहमी से कत्ल किया जाना यह साबित करता है कि क्षेत्र में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है. फिलहाल, इस कायरतापूर्ण वारदात के बाद पुलिस प्रशासन और शासन स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है, और तस्करों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है. सवाल यह है कि आखिर कब तक खाकी अपने फर्ज की कीमत अपनी जान देकर चुकाती रहेगी?
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