Bhopal news : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामला (Twisha Sharma Bhopal Case) लगातार उलझता जा रहा है. ताजा अपडेट के मुताबिक, कोर्ट ने मृतका के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. इधर समर्थ सिंह अभी भी फरार है. पुलिस ने फरार समर्थ सिंह पर 10 हजार रुपए का इनाम रखा है. पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक कर कई अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
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इस बड़े फैसले के बीच, आरोपी पक्ष (सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह) के वकील जॉर्ज ने 'एमपी तक' (MP Tak) से विशेष बातचीत में कई ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है. आरोपी पक्ष के वकील ने मायके वालों द्वारा लगाए गए दहेज हत्या के आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए मृतका की मानसिक स्थिति और पैसों के लेन-देन को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं.
पहला बड़ा प्वाइंट: दहेज मांगने का आरोप गलत, हमने खुद ट्विशा के खाते में भेजे थे 7.5 लाख रुपए
मायके पक्ष द्वारा लगाए गए 20 लाख रुपये के दहेज के आरोपों पर वकील जॉर्ज ने बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि एफआईआर में आरोप है कि ट्विशा के पास हाथ खर्च के पैसे नहीं थे, जबकि बैंक रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले 4-5 महीनों में खुद पति समर्थ सिंह ने 5,25,000 और सास गिरिबाला सिंह ने 1,80,000 रुपए से अधिक राशि इलेक्ट्रॉनिकली ट्विशा के खाते में ट्रांसफर की थी इसके अलावा शादी में ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा के खाते में भी पैसे ट्रांसफर किए गए थे. वकील ने कोर्ट से मांग की है कि बैंक स्टेटमेंट निकलवाकर जांच की जाए कि आखिर 4 महीने में ट्विशा ने 7.5 लाख रुपए कहां खर्च किए?
दूसरा प्वाइंट: मौत के 4 दिन बाद घर पहुंचे दो 'अमेज़न पार्सल'
वकील ने एक और हैरान करने वाली बात बताई कि ट्विशा की मौत के बाद, शनिवार (16 मई) को उनके घर पर अमेज़न (Amazon) से दो पार्सल डिलीवर हुए हैं. वकील ने कहा, "यह पार्सल किसने बुक किए? क्या इसके लिए ट्विशा ने पहले भुगतान किया था? हमने पुलिस और कोर्ट को लिखित में दिया है कि इन पार्सल्स को जब्त कर जांच की जाए ताकि ट्विशा की आखिरी मनोदशा का पता चल सके" .
तीसरा प्वाइंट: सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) की मरीज थीं ट्विशा शर्मा?
ससुराल पक्ष के वकील ने दावा किया कि ट्विशा मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं. उन्होंने कहा, "ट्विशा के हाथों में कंपन था. वह मानसिक तनाव और सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) से ग्रस्त थीं. वह मनोचिकित्सक से काउंसलिंग और डी-एडिक्शन (नशामुक्ति) की दवाइयां ले रही थीं. मौत वाले दिन भी वह शाम को कपल काउंसलिंग के लिए डॉक्टर के पास गई थीं." वकील का तर्क है कि दवाइयां बराबर न लेने के साइड इफेक्ट्स और अपनी खराब मनोदशा के चलते उन्होंने खुदकुशी का रास्ता चुना.
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चौथा प्वाइंट: मायके वालों ने कोर्ट में जो WhatsApp चैट्स सौंपे, वो एडिटेड हैं
ट्विशा के मायके वालों द्वारा कोर्ट में पेश किए गए उन WhatsApp चैट्स पर भी आरोपी पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं, जिनमें ट्विशा ने खुद को 'फंसा हुआ' (Trapped) बताया था. वकील ने कोर्ट में दलील दी कि ये चैट्स पूरी तरह से एडिटेड और टेंपर्ड (छेड़छाड़ की हुई) हैं. चैट्स में चार लाइनें लिखने के बाद पांचवीं लाइन गायब है. उन्होंने पुलिस से मांग की कि ट्विशा का असली मोबाइल जब्त कर सीधा प्रिंटआउट निकाला जाए ताकि सच सामने आ सके.
पांचवां प्वाइंट्स: जबरन गर्भपात (Abortion) नहीं, खुद की मर्जी से ली थी दवा
गर्भपात के आरोपों को खारिज करते हुए वकील ने कहा कि बंसल हॉस्पिटल के मेडिकल डॉक्यूमेंट्स में खुद ट्विशा ने लिखा था कि यह एक 'अनप्लांड प्रेगनेंसी' (Unplanned Pregnancy) है और उन्होंने एमटीपी (Medical Termination of Pregnancy) के लिए अपनी लिखित सहमति (Consent) दी थी. डॉक्टर के पास उन्होंने खुद कहा था कि कुछ दवाइयां या ड्रग्स खाने के कारण बच्चे को नुकसान हो सकता था, इसलिए वह गर्भपात कराना चाहती थीं.
'हमारी फैमिली को गलत फंसाया जा रहा है'
वकील जॉर्ज ने अंत में कहा कि समर्थ सिंह एक नामचीन और सफल क्रिमिनल लॉयर हैं, जो खुद अच्छा कमाते हैं, वह महज कुछ रुपयों के लिए अपनी पत्नी को प्रताड़ित क्यों करेंगे? उन्होंने साफ किया कि वे किसी भी जांच एजेंसी (यहां तक कि इंटरनेशनल एजेंसी) से जांच कराने को तैयार हैं क्योंकि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है.
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