थलापति विजय की जीत के पीछे छिपा है एक गहरा जख्म, आज भी बहन की याद में नम हो जाती हैं आंखें

न्यूज तक डेस्क

07 May 2026 (अपडेटेड: May 7 2026 5:00 PM)

बहन विद्या को बचपन में खोने का गम थलपति विजय आज भी अपनी बेटी के नाम और गाड़ी के नंबर में संजोए हुए हैं. अपनी छोटी बहन के प्रति उनका यह अटूट प्यार ही अब राजनीति के मैदान में उनकी सबसे बड़ी भावुक ताकत बन गया है.

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साउथ सिनेमा के थलापति यानी विजय अब सिर्फ परदे के हीरो नहीं रहे, बल्कि राजनीति के मैदान में भी अपनी धाक जमा चुके हैं. चुनावी जीत के बाद अब उनके तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं जोरों पर हैं. विजय की इस कामयाबी से उनके माता-पिता फूले नहीं समा रहे हैं और इसे उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. लेकिन इस चमक-धमक वाली लाइफ के पीछे एक ऐसा दर्द छिपा है, जिसने विजय को बचपन में ही झकझोर कर रख दिया था.
 

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विजय की जिंदगी में सबसे बड़ा गम तब आया जब उन्होंने अपनी छोटी बहन विद्या को खो दिया. विजय अपनी बहन से बेहद प्यार करते थे और दोनों के बीच एक अटूट रिश्ता था. लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, एक गंभीर बीमारी के चलते नन्ही विद्या ने विजय की गोद में ही दम तोड़ दिया था. उस वक्त विजय काफी छोटे थे, लेकिन बहन के जाने का सदमा उनके दिलो-दिमाग पर इस कदर छपा कि वो आज भी उस दुख से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं.
 

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भले ही विद्या को दुनिया छोड़े दशकों बीत चुके हैं, लेकिन विजय ने उन्हें अपनी यादों में आज भी जिंदा रखा है. बहन के प्रति उनका लगाव इस बात से साफ झलकता है कि जब उनके घर बेटी का जन्म हुआ, तो उन्होंने उसका नाम अपनी दिवंगत बहन विद्या से मिलता-जुलता 'दिव्या' रखा. यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अपनी बहन को दी गई एक भावुक श्रद्धांजलि थी, जो दिखाती है कि विजय के दिल में अपनी छोटी बहन के लिए कितनी जगह है.

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विजय की बहन के प्रति दीवानगी उनके घर के आंगन से लेकर सड़कों पर दौड़ने वाली उनकी गाड़ियों तक में नजर आती है. लंबे समय तक विजय की कारों की नंबर प्लेट पर '0277' अंक देखा गया. दरअसल, यह कोई मामूली नंबर नहीं बल्कि उनकी बहन की जन्म तारीख (14 फरवरी 1977) का एक हिस्सा है. वो जहां भी जाते, अपनी बहन की यादों को उस नंबर के जरिए अपने साथ रखते थे. यह उनका अपनी बहन को याद करने का एक अनोखा और निजी तरीका था.
 

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हालांकि, वक्त के साथ अब उनकी गाड़ियों के नंबर बदल चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि अब उनके नए नंबरों को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है. फैंस और सियासी जानकारों का कहना है कि विजय का नया नंबर साल 2026 में उनके मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी की ओर इशारा करता है. राजनीति में कदम रखने के बाद विजय की हर छोटी-बड़ी चीज अब चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें उनकी निजी भावनाएं भी शामिल हैं.
 

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1977 में जन्मी विद्या बहुत कम समय के लिए इस दुनिया में आईं, लेकिन वो अपने भाई विजय की शख्सियत पर एक गहरी छाप छोड़ गईं. आज विजय सफलता के जिस ऊंचे मुकाम पर खड़े हैं, वहां तक पहुंचने के संघर्ष में शायद उस नन्हीं बहन की यादें ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही हैं. थलपति विजय का यह इमोशनल पहलू बताता है कि पर्दे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला यह सुपरस्टार असल जिंदगी में एक बेहद भावुक भाई और इंसान है.

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