आम आदमी पार्टी (AAP) में अब तक का सबसे बड़ा फूट सामने आया है. दिल्ली और पंजाब की सत्ता पर काबिज 'आप' के भीतर ऐसी बड़ी टूट हुई है जिसने भारतीय राजनीति को हिलाकर रख दिया है. पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले संदीप पाठक और दिग्गज चेहरा राघव चड्ढा ने राज्यसभा के 5 अन्य सांसदों के साथ मिलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है.
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राज्यसभा में 'आप' का खेल खत्म?
राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा में 'आप' के कुल 10 सांसदों में से 7 (दो-तिहाई से अधिक) बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं. चड्ढा के मुताबिक, उन्होंने बगावत करने वाले सभी सांसदों के हस्ताक्षरित पत्र और आवश्यक दस्तावेज आज सुबह ही राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं.
इन सांसदों ने छोड़ी केजरीवाल की 'नाव'
- राघव चड्ढा और संदीप पाठक के अलावा इस बगावत में पंजाब और दिल्ली के बड़े चेहरे शामिल हैं-
- अशोक मित्तल
- हरभजन सिंह
- स्वाति मालीवाल (जिन्होंने चुनाव से पहले ही बगावत के संकेत दे दिए थे)
- विक्रम साहनी
- राजिंदर गुप्ता
राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल अब से कुछ ही देर में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर औपचारिक रूप से भगवा चोला पहनेंगे.
क्यों टूटा संदीप पाठक का मोह?
इस बगावत की पटकथा दिल्ली चुनाव में मिली हार के बाद लिखी गई. सूत्रों के मुताबिक, हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक को दरकिनार करना शुरू कर दिया था. 2022 पंजाब चुनाव से लेकर 2024 के अंत तक पार्टी के हर रणनीतिक फैसले लेने वाले पाठक को फैसले लेने की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया था. उन्हें छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का प्रभार देकर सीमित करने की कोशिश की गई, जबकि मनीष सिसोदिया, आतिशी और गोपाल राय जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई.
विपक्ष में खलबली, बीजेपी को बड़ी मजबूती
राज्यसभा में 'आप' के दो-तिहाई सांसदों का साथ आना बीजेपी के लिए बड़ी रणनीतिक जीत है. इससे न केवल ऊपरी सदन में बीजेपी की ताकत बढ़ेगी, बल्कि 'दल-बदल विरोधी कानून' के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर भी खतरा कम होगा क्योंकि यह दो-तिहाई का विभाजन है. राघव चड्ढा ने साफ शब्दों में कहा, "हम बीजेपी जॉइन कर रहे हैं ताकि जनहित के मुद्दों को सही मंच पर उठा सकें. हमने देश को बचाने के लिए यह कदम उठाया है."
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