ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का नियम बदलने वाला है! अब नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर
न्यूज तक डेस्क
• 01:01 PM • 25 Oct 2026
सड़क परिवहन मंत्रालय के नए प्रस्ताव के तहत अब अलग-अलग रंगों में PVC स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जिन पर ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी नंबर भी दर्ज होंगे.
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यदि आप भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं या फिर उस पर अपना नाम-पता अपडेट कराने के झंझट से परेशान हैं, तो यह खबर आपके बड़े काम की है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इन नए नियमों का मकसद आम जनता के लिए पूरी प्रक्रिया को कागजी झंझटों से मुक्त करना और पहले से ज्यादा पारदर्शी बनाना है.


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सबसे बड़ा बदलाव लाइसेंस के लुक और फॉर्मेट में देखने को मिल सकता है. प्रस्ताव के मुताबिक, अब भारतीय नागरिकों और विदेशियों के ड्राइविंग लाइसेंस के रंग और फॉर्मेट बिल्कुल अलग होंगे, जिससे दोनों की पहचान आसानी से हो सकेगी. इसके अलावा, सभी लाइसेंस अब फॉर्म 7 के तहत लैमिनेटेड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) यानी स्मार्ट कार्ड के रूप में दिए जाएंगे, जो दिखने में भी काफी प्रीमियम और टिकाऊ होंगे.
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सुरक्षा के लिहाज से भी लाइसेंस में कुछ बेहद जरूरी जानकारियां जोड़ी जा रही हैं. नए प्रस्ताव के तहत अब ड्राइविंग लाइसेंस पर धारक का ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और एक इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर प्रिंट होना अनिवार्य किया जा सकता है. सड़क पर चलते वक्त यदि कभी कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाती है, तो इन डिटेल्स की मदद से पीड़ित के परिवार तक तुरंत पहुंचना और उसकी जान बचाना आसान हो जाएगा.


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कागजी कार्रवाई को आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने एफिडेविट (शपथ पत्र) की अनिवार्यता खत्म करने का भी मन बना लिया है. अभी तक उम्र और पते के प्रमाण के लिए एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी से हलफनामा बनवाना पड़ता था, जिसमें काफी समय और पैसा दोनों खर्च होते थे. अब सरकार इसे हटाने जा रही है, हालांकि कुछ चुनिंदा मामलों में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और अन्य दस्तावेजों को वैध प्रमाण के रूप में मान्यता दी जाएगी.
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एड्रेस और उम्र के प्रूफ के रूप में अब आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, ई-राशन कार्ड, बिजली या गैस का तीन महीने पुराना बिल जैसे कई विकल्प पूरी तरह मान्य होंगे. खास बात यह है कि अगर आप अपने लाइसेंस में नाम या पता बदलवाना चाहते हैं, तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी के लिए यह जरूरी होगा कि वह महज 15 दिनों के भीतर आपके आवेदन पर फैसला ले. अगर आवेदन खारिज होता है, तो उसकी ठोस वजह भी बतानी होगी.


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इतना ही नहीं, लाइसेंस में नाम या पता जैसी पर्सनल डिटेल अपडेट करवाने के लिए लगने वाली फीस को भी पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही, यदि आप ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान आधार ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करते हैं, तो मंत्रालय कई अन्य डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस सेवाओं की फीस में भी भारी छूट दे सकता है, जिससे जनता की जेब पर बोझ कम पड़ेगा.
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ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा और नियमों की समझ बढ़ाने के लिए ऑनलाइन टेस्ट के नियमों को भी सख्त किया जा रहा है. फिलहाल सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट को पास करने के लिए 60 फीसदी अंकों की जरूरत होती है, जिसे बढ़ाकर सीधे 75 फीसदी करने का प्रस्ताव है. साथ ही, यह ऑनलाइन ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का होगा, ताकि हर आवेदक सड़क सुरक्षा के गुर अच्छी तरह सीख सके.


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फिलहाल सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में इन बदलावों को लेकर एक ड्राफ्ट जारी किया है और आम जनता तथा संबंधित पक्षों से इस पर सुझाव मांगे हैं. ड्राफ्ट पब्लिश होने के 30 दिनों के भीतर लोग अपनी राय दे सकते हैं. एक बार ये नियम फाइनल होकर लागू हो गए, तो देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का पूरा अनुभव ही बदल जाएगा.
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