इच्छा मृत्यु पाने वाले हरीश राणा का वेटलिफ्टिंग चैंपियन बनने का सपना टूटा, लेकिन अब भी 4 लोगों को दे सकते हैं नई जिंदगी, डॉक्टर ने बताई पूरी बात

Harish Rana organ donation story: वेटलिफ्टिंग चैंपियन बनने का सपना देखने वाले हरीश राणा को 13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छा मृत्यु की मंजूरी दे दी है. परिवार ने उनके अंगदान का फैसला लिया है, जिससे चार लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है. जानिए 13 साल पहले के हादसे से लेकर अंग दान करने तक की पूरी कहानी.

Harish Rana organ donation story
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न्यूज तक डेस्क

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परिवार को संभालने और आंखों में अपने खुद के तमाम सपने संजोए हुए हरीश राणा ने जुलाई 2010 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था. हरीश ने सिविल इंजीनियरिंग कोर्स चुना और मन लगाकर पढ़ने लगे. हरीश की मेहनत का फल भी दिखा और उनके पिता अशोक राणा के मुताबिक वह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के टॉपर थे. उन्होंने बताया कि हरीश पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी एक्टिविटी में भी भाग लेते और उन्होंने यूनिवर्सिटी लेवल पर दो कॉम्पीटिशन जीत रखा था. बताया जा रहा है कि वे वेटिलिफ्टिंग चैंपियन बनना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही उनका सपना चकनाचूर हो गया.

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20 अगस्त 2013(मंगलवार) को रक्षाबंधन के दिन वह अपने पीजी में ही थे और फोन पर बहन से बातचीत कर रहे थे. इसी बीच बात करते हुए वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए. हरीश को आनन-फानन में PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया. पिछले 13 साल से लगातार चल रहे इलाज के बाद अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया(इच्छा मृत्यु) की मंजूरी दे दी है. लेकिन हरीश राणा जाते-जाते भी 4 लोगों को जीवनदान दे सकते है और इसके लिए परिवार ने मंजूरी दे दी है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

हरीश के अंगों से 4 लोगों को मिल सकती है जीवनदान

दरअसल बीते कल यानी 11 मार्च को सु्प्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के पैसिव येथेनेशिया की मंजूरी दे दी और कहा कि इस प्रक्रिया को पूरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए. अब हरीश के माता-पिता ने उनके अंगदान करने का निर्णय लिया है. अमर उजाला में छपी एक खबर के मुताबिक हरीश के पिता ने कहा है कि उनके बेटे को जो भी अंग काम करेंगे, वह उसे दूसरों को दान करने के लिए तैयार है. 

अमर उजाला के साथ बातचीत में क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. अरविंद डोगरा ने कहा है कि, हादसे के वक्त हरीश युवा और स्वस्थ थे और तब उनके सभी अंग काम कर रहे थे. घटना की वजह से उन्हें लकवा(quadriplegia) मार दिया था, जिस वजह से हाथ-पैर काम करना बंद कर दिया था, लेकिन उनके और अंग जैसे गुर्दे, लिवर और कॉर्निया सेफ है. इन्हीं अंगों को दान कर 4 लोगों को जीवनदान मिल सकता है.

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अंगदान से पहले होगी जांच

डॉ. डोगरा ने साफ कहा है कि अंगदान करने से पहले एक विशेष जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके की कौन सा अंग कितना काम कर रहा है. इस जांच के बाद ही यह फैसला लिया जाएगा की कौन सा अंग दान करने लायक है या नहीं. वहीं आईएमए गाजियबाद की अध्यक्ष डॉ. कल्पना कंसल ने परिवार के इस फैसले की सराहना की है.

टूटा वेटलिफ्टिंग चैंपयिन बनने का सपना

जब हरीश के साथ यह दुर्घटना हुई तब वे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर के स्टूडेंट थे और उनका वेटलिफ्टिंग चैंपियन बनने का सपना था. उन्होंने यूनिवर्सिटी लेवल पर 2 प्रतियोगिता भी जीत ली थी और तीसरा पंजाब यूनिवर्सिटी में जीतना था. लेकिन नियति को मानिए तो कुछ और ही मंजूर था क्योंकि तीसरे कॉम्पीटिशन से पहले ही उनके साथ यह हादसा हो गया, जिसके बाद वह कभी बेड से नहीं उठ पाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छा मृत्यु की मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरीश की स्थिति को देखते हुए उनके परिवार ने 2024 में पैसिव यूथेनेशिया की मांग की थी. पहले मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट आया. इसी बीच मेडिकल बोर्ड ने भी रिपोर्ट दी कि हरीश का ठीक होना लगभग असंभव है. परिवार की मांग और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को पैसिव यूथेनेशिया को मंजूरी दी. कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें AIIMS के पैलिएटिव केयर में भर्ती कराया जाएगा ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट प्रोसेस के साथ वापस लिया जा सके और साथ ही पूरी प्रक्रिया को डिग्निटी के साथ करने की भी बात कही है.

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