UP Politics News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़ी हलचल देखने को मिल रही हैं. पहली हलचल समाजवादी परिवार और पार्टी से जुड़ी है, जहां सालों पुराने पारिवारिक विवाद के बाद लोहिया ट्रस्ट की कमान फिर से अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के पास आ गई है. दूसरी ओर, NDA के अहम सहयोगी और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के बगावती सुरों ने बीजेपी के लिए नई सिरदर्दी खड़ी कर दी है. 'आज का यूपी' शो में वरिष्ठ पत्रकार कुमार अभिषेक ने इन दोनों मुद्दों पर विस्तार से बात की और पूरे मामले को आसान तरीके से समझाया.
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शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव को सौंपा लोहिया ट्रस्ट
वर्ष 2016 में जब समाजवादी पार्टी और परिवार के भीतर खींचतान चल रही थी, तब मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट (Lohia Trust) के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और इसकी जिम्मेदारी शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) को सौंप दी गई थी. हालांकि, अब रक्षाबंधन से ठीक पहले आयोजित एक बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शिवपाल यादव ने इस ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को वापस सौंप दी.
मुलायम सिंह यादव का इमोशनल कनेक्ट और लोहिया ट्रस्ट की संपत्ति
1992 में गठित यह लोहिया ट्रस्ट मुलायम सिंह यादव का बेहद खास प्रोजेक्ट रहा है. समाजवादी पार्टी का बौद्धिक कार्य, विचारधारा का प्रचार-प्रसार और बुलेटिन का प्रकाशन इसी ट्रस्ट के माध्यम से होता आया है. इसके अलावा, यादव लैंड में पार्टी के कई दफ्तर और चल-अचल संपत्ति लोहिया ट्रस्ट के ही नाम पर हैं. शिवपाल यादव द्वारा अखिलेश को यह ट्रस्ट सौंपने के बाद पार्टी और संगठन में अखिलेश यादव का पूरा सर्किल कंप्लीट माना जा रहा है.
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संजय निषाद के बगावती सुर, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ?
दूसरी बड़ी खबर निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद को लेकर है. गोंडा में विनोद निषाद की हत्या के बाद से संजय निषाद लगातार अपनी ही सरकार और सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे (Mata Prasad Pandey) से भी मुलाकात की, जिसके बाद उनके सपा के पाले में जाने के कयास तेज हो गए हैं.
2027 चुनावों में 16 सीटों की मांग और अल्टीमेटम
संजय निषाद ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि बीजेपी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया, तो वह वक्त नहीं गवाएंगे और अपना फैसला ले लेंगे. वह अपने कोर मुद्दे (निषाद, मल्लाह, कश्यप बिरादरी को एसटी/एससी आरक्षण दिलाने) को लेकर समाज के दबाव में हैं. 2027 के चुनाव में वह बीजेपी से 16 से ज्यादा सीटों और हारी हुई सीटों की मांग कर रहे हैं. हालांकि, एनडीए में सुभासपा और आरएलडी के शामिल होने से सीटों का बंटवारा पेचीदा हो गया है. अब देखना होगा कि बीजेपी संजय निषाद की मांगों को कैसे संभालती है.
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