रिपोर्ट का दावा, 14-18 साल के स्टूडेंट्स को क्लास 2 की किताबें ही पड़ रहीं भारी, ग्रामीण शिक्षा का ये है हाल!

अभिषेक गुप्ता

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Pratham Foundation ASAR Report: प्रथम फाउंडेशन ने शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASAR) जारी किया है. रिपोर्ट की थीम ‘बियॉन्ड बेसिक्स’ है. ASER एक राष्ट्रव्यापी नागरिक नेतृत्व वाला घरेलू सर्वे है, जो ग्रामीण भारत में बच्चों की स्कूली शिक्षा और छात्रों के सीखने की स्थिति पर प्रकाश डालता है. इस रिपोर्ट में कई ऐसी बातें है जो देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. आइए आपको बताते है एस रिपोर्ट की कुछ प्रमुख बिन्दु.

रिपोर्ट के मुताबिक देश में 14-18 साल के 86.8 फीसदी बच्चे स्कूल में इनरोल हैं. इनमें से 25 फीसदी छात्र ऐसे है जो अपनी मातृभाषा में कक्षा दो की किताब को भी अच्छे से नहीं पढ़ पाते है. सर्वे में ये पाया गया कि, जहां छात्राओं ने अपनी मातृभाषा में कक्षा दो के स्तर का पाठ पढ़ने में छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया, वहीं छात्रों ने गणित और अंग्रेजी पढ़ने में छात्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया.

गणित के बेसिक स्किल के परीक्षण में ये पाया गया कि, लगभग 85 फीसदी बच्चे शून्य सेमी से शुरू करके आसानी से लंबाई माप सकते हैं, लेकिन शुरुआती बिंदु शून्य से बदल के कुछ और कर देने पर केवल 39 फीसदी बच्चे ही ऐसा कर पा रहे है.

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– ASAR रिपोर्ट के अनुसार, 14-18 साल के आधे से अधिक छात्र भाग(डिवीजन) की समस्या से जूझते हैं. केवल 43.3 फीसदी बच्चे ही भाग को सही ढंग से हल करने में सक्षम हैं. हालांकि आमतौर पर यह स्किल तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों से आसानी से हाल करने की अपेक्षा की जाती है.

लगभग 57.3 फीसदी छात्र अंग्रेजी आसानी से पढ़ सकते हैं, वहीं जो छात्र अंग्रेजी पढ़ सकते है, उनमें से लगभग तीन-चौथाई छात्र उनके अर्थ भी बता सकते हैं.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, कक्षा 11वीं या इससे ऊपर की कक्षा में 55.7 फीसदी छात्र आर्ट या ह्युमिनिटी स्ट्रीम में इनरोल हैं, इसके साथ साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स(STEM) स्ट्रीम में 31.7 फीसदी और कॉमर्स में 9.4 फीसदी छात्र इनरोल है.

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28.1 फीसदी महिलाओं के STEM (विज्ञान, टेक्नॉलजी, इंजीनियरिंग और गणित) में करियर बनाने के प्रति रुझान है, जबकि इसी आयु वर्ग के 36.3 फीसदी पुरुषों की इन विषयों में रुचि है.

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यह सर्वे 26 राज्यों के 28 जिलों में किया गया. इसके तहत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो जिलों का सर्वे किया गया, वहीं प्रत्येक प्रमुख राज्य के एक ग्रामीण जिले के कुल 34745 युवाओं तक पहुंच कर यह सर्वे किया गया. ASER एक राष्ट्रव्यापी नागरिक नेतृत्व वाला घरेलू सर्वे है, जो ग्रामीण भारत में बच्चों की स्कूली शिक्षा और सीखने की स्थिति पर प्रकाश डालता है.

अब जानिए प्रथम फाउंडेशन के बारे में जो जारी करता है ASAR रिपोर्ट

‘प्रथम फाउंडेशन’ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार के लिए काम करता है. इसकी स्थापना 1995 में हुई थी. तब यह मुंबई की मलिन बस्तियों में बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का काम करता था. इसके बाद इसने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया जो अब देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त कमियों को दूर करने के लिए सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में से एक के रूप में माना जाता है. प्रथम फाउंडेशन भारत में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर स्थायी सफलता हासिल करने वाला प्रमुख संगठन है.

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