कोर हिंदू या न्यूट्रल वोटर्स किसपर करें फोकस? समझिए दो फेज के बाद BJP की दुविधा कैसे बढ़ी
2019 में बीजेपी का वैचारिक वोट शेयर उसके कुल वोट शेयर 38 फीसदी में से 26 फीसदी का था और 12 फीसदी वोट न्यूट्रल या मोदी फैक्टर वोट था.
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Lok Sabha Election: लोकसभा चुनावों में दो चरणों में हुई कम वोटिंग ने क्या बीजेपी की चिंताएं बढ़ा दी हैं? ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पीएम मोदी समेत बीजेपी की टॉप लीडरशिप के सुर अचानक से बदले नजर आ रहे हैं. पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे फायर ब्रांड नेता एक सुर से अपने भाषणों में कांग्रेस को मुस्लिम हितैषी बताने में जुटे नजर आ रहे हैं. इसकी शुरुआत हुई पिछले दिनों राजस्थान में दिए गए पीएम मोदी के एक चुनावी भाषण से. इसमें पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोगों की संपत्ति, मंगलसूत्र छीनकर मुस्लिमों को देना चाहती है. लोगों ने कहा कि पीएम मोदी ठंडे पड़े चुनाव को गर्मा रहे हैं. फिर तो बीजेपी के दूसरे नेता इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने में जुट गए. आखिर जो बीजेपी 400 सीटें जीतने का कॉन्फिडेंस शो कर रही थी, उसे बीच चुनाव में गर्मी बढ़ाने वाली रणनीति पर क्यों उतरना पड़ा? क्या बीजेपी अपने कोर हिंदुत्व वोटर्स में पैदा हुई किसी निराशा को भांप रही है और चुनावी सुर बदल रही है? या बीजेपी किसी दुविधा का शिकार है? चुनाव विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने इसी बात को समझने की कोशिश की है.