पब्लिसिटी के पीछे छात्रनेता कर रहे गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्तों को शर्मसार, जानें कौन-कौन!

राजस्थान तक

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Behind the publicity, the student leaders are embarrassing the sacred relationship of Guru-disciple, know who all!

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राजस्थान में कुछ छात्रों और छात्रनेताओं को लगने लगा है कि अगर बड़ा नेता बनना है तो इस तरह चीखना-चिल्लाना होगा। कॉलेज के शिक्षकों और स्टाफ को धमकाना होगा… और अपने ही शिक्षकों की इस तरह सबके सामने इज्जत उतारनी होगी। तभी वो लाइम लाइट में आएंगे.. 4 लोग जानेंगे, सोशल मीडिया पर फॉलोअर बढ़ेंगे और बड़ा नेता बनेंगे। तस्वीरों में दिख रहे ये कोई बाहुबली नहीं हैं, बल्कि छात्रों के हक की लड़ाई लड़ने वाले छात्रनेता हैं। क्या रामनिवास, क्या गुलशन क्या हरफूल और क्या निर्मल चौधरी। सब के सब को मानो नेता बनने का यही एक फॉर्मूला समझ आता है। शिक्षा के मंदिर में पब्लिसिटी स्टंट के नाम पर कुछ छात्रनेता गुरु और शिष्य के रिश्तों को दिन पे दिन शर्मनाक बना रहें है। राजस्थान में पिछले कुछ महीनों में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र नेताओं के ऐसे-ऐसे वीडियो वायरल हुए है जिन्हें देखकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि ये छात्र नेता हैं या फिर गली के गुंडे।

अब आप बताइए, छात्रों के हक की लड़ाई लड़ने के नाम पर ये गुंडागर्दी कहां तक जायज है। छात्रों की लड़ाई के नाम पर ये नेता अपने ही कॉलेज के प्रोफेसर, डीन और वीसी तक से बदसलूकी पर उतर आए हैं। कोई किसी का कॉलर पकड़ता तो, कोई किसी को गाली देता है तो कोई कॉलेज के बाहर देख लेने की धमकी देता है। राजस्थान युनिवर्सिटी छात्रसंघ के वर्तमान अध्यक्ष निर्मल चौधरी की ये तस्वीरें कौन भूल सकता है। जब चुनाव से पहले वो रोज इसी अंदाज में किसी न किसी से भिड़ते नजर आते थे। छात्रों के लिए निर्मल चौधरी ने लंबी लड़ाई लड़ी.. अपने तीखे तेवर और बुलंद आवाज से सबकी बोलती बंद कर दी। राजस्थान युनिवर्सिटी का ऐसा कोई कोना नहीं होगा जहां निर्मल ने दहाड़ा नहीं होगा और लंबी लड़ाई के बाद निर्मल चौधरी को आखिरकार जीत मिली, वो भी निर्दलीय और वो राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने। अब शायद निर्मल के इसी स्टाइल को बाकी लोग कॉपी करने लगे हैं, और जिसे देखो उसने शिक्षकों से भिड़ने को ही नेता बनने का फॉर्मूला बना लिया है।

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आपको बताएं कि इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि सोशल मीडिया पर वायरल सभी वीडियोज में एक एक्शन और एक बात कॉमन है, वो ये कि सारे छात्रनेता कॉलेज में शिक्षकों और स्टाफ के टेबल पर पर जोर-जोर से हाथ पटकते देखें जा सकते हैं, फिर जोर-जोर से चिल्लाते हुए खुद के ही वीडियो वायरल करते हैं। उन्हें लगता है कि इससे उन्हें छात्रों की सहानुभूति मिलेगी और सोशल मीडिया पर पब्लिकसिटी। लेकिन इसके पीछे वो किस तरह की मिसाल पेश कर रहे हैं इसका अंदेशा शायद उन्हें नहीं है। एक बार के लिए वो भले ही हिट हो जाएंगे लेकिन अपने गुरु की नजर में वो हमेशा-हमेशा के लिए नीचे गिर जाते हैं।

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