Chaitra Navratri 2026: 19 या 20 मार्च? जानें कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्रि और कलश स्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त!
न्यूज तक डेस्क
• 10:24 AM • 17 Mar 2026
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, जिसमें ब्रह्म योग और मालव्य राजयोग जैसे दुर्लभ संयोगों के बीच कलश स्थापना के लिए सुबह का समय शुभ है.
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हिंदू धर्म में आस्था और नई ऊर्जा का संगम 'चैत्र नवरात्रि' बस आने ही वाली है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि को लेकर अगर आपके मन में तारीखों का उलझन है तो स्पष्ट कर दें कि इस बार शक्ति की उपासना का यह महापर्व 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है.


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वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली भक्ति की गंगा बहेगी, जिसका समापन 27 मार्च को होगा. हिंदू नववर्ष की शुरुआत के प्रतीक इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करेंगे.
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. भक्त अपने घरों में अखंड ज्योत जलाते हैं और कलश स्थापित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. अगर आप भी मां के स्वागत की तैयारी कर रहे हैं, तो प्रतिपदा तिथि का समय नोट कर लें. चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:54 बजे से शुरू होगी और अगले दिन यानी 20 मार्च को तड़के 4:51 बजे समाप्त हो जाएगी.


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कलश स्थापना के लिए मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है. इस बार 19 मार्च को घटस्थापना के लिए कई शुभ विकल्प मौजूद हैं. सबसे पहली 'शुभ बेला' सुबह 06:50 से 07:20 तक रहेगी. इसके अलावा दोपहर में 'अभिजीत मुहूर्त' 12:20 से 1:20 तक और 'लाभ अमृतबेला' दोपहर 12:50 से 3:50 तक रहेगी. जो लोग सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पा रहे हैं, वे अभिजीत मुहूर्त में मां का आह्वान कर सकते हैं. सही मुहूर्त में की गई पूजा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.
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ज्योतिष की दृष्टि से चैत्र नवरात्रि 2026 बेहद खास होने वाली है. पहले ही दिन आकाश मंडल में शुभ 'ब्रह्म योग' और 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का संयोग बन रहा है. इतना ही नहीं, ग्रहों की चाल भी बड़ी दिलचस्प है; मीन राशि में सूर्य, चंद्रमा, शनि और शुक्र मिलकर 'चतुर्ग्रही योग' बनाएंगे. साथ ही, शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण 'मालव्य महापुरुष राजयोग' का निर्माण हो रहा है. ज्योतिषियों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ संयोगों में की गई साधना कई गुना अधिक फलदायी और सफलता दिलाने वाली होती है.


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नवरात्रि केवल व्रत और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खुद को भीतर से शुद्ध करने का समय है. मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की पूजा हमें शक्ति, ज्ञान और संयम का पाठ पढ़ाती है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां की चौकी सजाते हैं और नियमों का पालन करते हैं, उनके जीवन से हर तरह की नकारात्मकता और संकट दूर हो जाते हैं. इन नौ दिनों में वातावरण में एक अलग ही पवित्रता होती है जो मन को शांति और तन को स्वास्थ्य प्रदान करती है.
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समापन की बात करें तो भक्त पूरे नौ दिनों का उपवास रखने के बाद दशमी तिथि को पारण करते हैं. चैत्र नवरात्रि का यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और शक्ति की ही होती है. तो आप भी तैयार हो जाइए 19 मार्च से शुरू होने वाले इस पावन उत्सव के लिए. मां के जयकारों के साथ अपने घर और जीवन में खुशियों का स्वागत करें.
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