छत्तीसगढ़ का खजुराहो: 11वीं सदी का भोरमदेव मंदिर, रहस्य और रोमांच के साथ नक्काशी का अद्भुत नमूना

Chhattisgarh Tourism: छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहलाने वाला भोरमदेव मंदिर 11वीं सदी की नक्काशी, नागर शैली और रहस्यमय कामकला के लिए प्रसिद्ध है. जानिए कैसे पहुंचें और क्या देखें.

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भोरमदेव मंदिर की दीवारों पर प्राचीन नक्काशी और नागर शैली का स्थापत्य
तस्वीर- छत्तीसगढ़ टूरिज्म
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Chhattisgarh Tourism: भोरमदेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि 11वीं–12वीं सदी के कल्चुरी-नागवंशी शाहियों की कलाकारी और सांस्कृतिक दृष्टि की प्रतिमूर्ति है. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले (कवार्धा) स्थित यह मंदिर ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहलाता है, क्योंकि इसकी चारों ओर बनी मूर्तियों में काम-शिल्प, काम-कामुकता और जीवन की विविध झलक स्पष्ट रूप से उभरती है. भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित, आज भी यह कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.