आंखों देखी: बस हादसे में फरिश्ता बन गए ये 3 युवक, अगर नहीं पहुंचते तो बढ़ जाते मरने वाले
Khargone Bus Accident: खरगोन में मंगलवार को सुबह बड़ा बस हादसा हो गया. इसमें 22 लोगों की जान चली गई. लेकिन मरने वालों की संख्या और बढ़ जाती, अगर ग्रामीण वहां नहीं पहुंचते. MP Tak आपको मिलवा रहा है, हादसे के दौरान फरिश्ता बनकर काम करने वाले तीन युवकों से, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से कई […]
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Khargone Bus Accident: खरगोन में मंगलवार को सुबह बड़ा बस हादसा हो गया. इसमें 22 लोगों की जान चली गई. लेकिन मरने वालों की संख्या और बढ़ जाती, अगर ग्रामीण वहां नहीं पहुंचते. MP Tak आपको मिलवा रहा है, हादसे के दौरान फरिश्ता बनकर काम करने वाले तीन युवकों से, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से कई लोगों की जान बचाई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. यहां तक कि कुछ लोगों की सांस लौटाने के लिए सीपीआर भी दी.
पारस ने CPR देकर बचाई लोगों की जान
बस हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचे पहले कुछ लोगों में शामिल था पारस पाटीदार. पारस ने बताया- गांव में मेरे भांजे की भांजे की शादी में शामिल होने आया था. जैसे ही हादसे की जानकारी लगी. तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गया था और उल्टी हो गई बस को लोगों की मदद से सीधा किया, इसके बाद जिन लोगों की सांसें चल रही थीं, उन्हें सीपीआर देकर उनकी सांसें लौटाने की कोशिश की. युवक ने बताया घटना के तुरंत बाद पूरा गांव एकत्रित होकर घायलों को बस से निकालकर अपने निजी वाहनों से अस्पताल तक पहुंचाया गया.
हमने बस को सीधा किया और कांच तोड़कर घायलों को बाहर निकाला
ग्रामीण कैलाश पाटीदार ने बताया- मैं घर पर ही था. मेरे पास फोन आया कि वहां पर एक एक्सीडेंट हो गया है. मैं तुरंत घटना स्थल पर पहुंचा. पुल से नीचे उतरकर तेजी से बस के पहुंचा, मैंने बस के कांच तोड़े, क्योकि घायलों को बाहर निकालने का कोई और रास्ता नहीं था, मैंने तुरंत जो लोग जीवित थे और चोट की वजह से कराह रहे थे. उन्हें तुरंत बाहर निकाला, इसके बाद हम सभी गांव वालों ने जिन लोगों की मौत हो चुकी थी, उन्हें भी बाहर निकाला. बाहर निकालने के बाद फौरन एम्बुलेंस की सूचना दी, लेकिन एंबुलेंस आने में देरी होते देख हम लोगों ने घायलों को अपने वाहनों से ही खरगोन जिला अस्पताल पहुंचाया.
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हमारे पास जो भी वाहन थे, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल. उनकी मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल पहुंचने के बाद कई लोग की जान बचाई जा सकी.
बस के अंदर से आ रही थी चीखने-चिल्लाने की आवाजें
सुदेश पाटीदार ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी लगी हम लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए. हम लोगों ने बस में से लोगों को खीच कर बाहर निकाला. जो लोग उसमें घायल थे. उनकी चीखने-चिल्लाने की आवाजें बाहर आ रही थी. ग्रामीणों की मदद से पलटी खाई हुई बस को हम लोगों ने ही सीधा किया. ये हादसा तो होना ही था क्योंकि ये बस न तो बस्ती में धीमी गति से चलती है और खुली सड़क पर तो बात ही अलग है. पुलिस के आने के पहले ही हम लोग सभी घायलों को बाहर निकालकर हॉस्पिटल पहुंचा चुके थे.
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