संजय सिंह की गिरफ्तारी, “आप” का क्या है दिल्ली शराब घोटाला मामला

ईडी ने आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को अब कथित दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है. इस घटना के…

ईडी ने आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को अब कथित दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है. इस घटना के बाद कई विपक्षी नेता जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार द्वेष भावना के साथ यह कार्रवाई कर रही है.

आखिर क्या है दिल्ली शराब घोटाला मामला जिसके पीछे मचा है बवाल, आइए समझते हैं

क्या है नई शराब नीति

दरअसल 17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की थी. इसे एक्साइज पॉलिसी भी कहते हैं. इसके तहत दिल्ली सरकार ने शराब का कारोबार पूरी तरह से निजी हांथों को सौंप दिया और खुद इससे पूरी तरह से बाहर हो गई. इसे लेकर सरकार का कहना था कि हम शराब कारोबार से माफिया राज को खत्म करना चाहते हैं. दूसरा तर्क सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी का भी दिया गया.

इस नीति के तहत दिल्ली को कुल 32 जोन में बांटा गया और हर जोन में 27 शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दी. इससे दिल्ली में कुल 849 दुकानें खोली गईं. कई वॉर्ड्स में तो 3-4 दुकानें तक खोली गईं. इस कारण भी इस नीति को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. होटल, क्लब, रेस्तरां और बार को रात को 3 बजे तक खोलने की इजाजत मिली. कुछ लाइसेंस धारकों को 24 घंटे तक शराब बेचने की अनुमति मिली.

सिर्फ 16 कंपनियों को ही शराब के डिस्ट्रीब्यूशन का अधिकार दिया गया. इससे कॉम्पटीशन कम होने के आरोप लगे, साथ ही बड़ी कम्पनियों ने अपनी शराब पर ज्यादा डिस्काउंट के साथ शराब बेचना शुरु की. कहीं-कहीं तो शराब की दुकानों पर ऑफर तक निकलने लगे. एक शराब की बोतल पर एक या एक से अधिक बोतलें मुफ्त में मिलने लगी. इससे दुकानों पर भीड़ दिखने लगी. इसमें दुकानदार और ग्राहक दोनों को फायदा दिखता रहा. जिससे छोटे व्यापारियों को अपने लाइसेंस लौटा देने पड़े और अपना कारोबार समेटना पड़ा.

नतीजे ठीक उलट आए

31 जुलाई 2022 के एक कैबिनेट नोट में सरकार ने माना कि भारी बिक्री के बावजूद उसके राजस्व को भारी नुकसान हुआ है. 2022-2023 की पहली तिमाही में दिल्ली सरकार को 1485 करोड़ रुपए का राजस्व मिला जो बजट अनुमान से 37.51 फीसदी कम था.

दिल्ली शराब घोटाले में क्या हैं आरोप

इस नीति में गड़बड़ी का सबसे पहला आरोप दिल्ली सरकार में मुख्य सचिव नरेश कुमार ने लगाया. नरेश कुमार अपनी रिपोर्ट दिल्ली के उप-राज्यपाल वी.के. सक्सेना को सौंपते हैं. रिपोर्ट में मनीष सिसौदिया पर शराब करोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया. दिल्ली के उप-राज्यपाल ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर 22 जुलाई 2022 को सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी.

सीबीआई ने केस दर्ज कर इसमें जांच करना शुरु की. इसी के अगले महीने ईडी ने भी मनी लॉंड्रिंग का केस दर्ज कर जांच करना शुर कर दी. इसी केस में 2023 के फरवरी महीने में सिसौदिया को गिरफ्तार किया गया था.

यह घोटाला करीब 2800 करोड़ का बताया गया है. ईडी और सीबीआई का कहना रहा है कि शराब घोटाले की वजह से पार्टी को जो फंड मिला है उसका इस्तेमाल चुनाव में किया गया है. तमाम विवाद, आरोप-प्रत्यारोप, राजस्व के नुकसान और सीबीआई जांच के बाद दिल्ली सरकार ने अपने कदम वापिस खींचे और 1 सितंबर 2022 से पुरनी शराब नीति को फिर से लागू कर दिया.

गौरतलब है कि 5 अक्टूबर दिन गुरुवार को ईडी ने संजय सिंह की गिरफ्तारी कर Rouse Avenue Court में पेश किया तो दूसरी ओर वहीं सुप्रीम कोर्ट में मनीष सिसौदिया की बेल को लेकर भी सुनवाई चल रही थी. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को भी घेरे में लिया.

सिसौदिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि आप कहते हैं कि पैसा राजनैतिक पार्टी को मिला तो फिर अभी तक पार्टी आरोपी क्यों नहीं बनाई गई. कोर्ट ने दोनों एजेंसियों से सवाल करते हुए कहा कि आपके पास जो सबूत हैं उन्हें सबूत माना भी जाए या नहीं और अगर आपके इन आरोपों पर सवाल-जवाब होंगे तो आपको केस दो मिनट में औंधे मुंह गिर जाएगा. कोर्ट ने जांच एजेंसी से कहा कि अगर मनीष सिसौदिया तक पैसा पहुंचा है तो आपको एक सबूतों की चेन खड़ी करनी होगी.

संजय सिंह पर चार्जशीट में क्या आरोप

संजय सिंह ने ही दिनेश अरोड़ा नाम के व्यापारी की मुलाकात मनीष सिसौदिया से करवाई थी. ईडी ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि संजय सिंह केवल मीटिंग्स का आयोजन करने में ही शामिल नहीं थे, बल्कि उन्होंने वित्तीय लेन-देन भी किया था. अब सरकारी गवाह व्यापारी दिनेश अरोड़ा ने ईडी को बताया कि उन्होंने संजय सिंह को करोड़ों रुपए दिए थे.

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