साउथ में कांग्रेस के लिए ऑल इज वेल! डीएमके संग इस फॉर्म्युले पर काम कर रही है पार्टी

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Congress-DMK Alliance: हाल के दिनों में विपक्षी INDIA गठबंधन थोड़ा-थोड़ा बिखर रहा है. बंगाल में ममता, पंजाब में केजरीवाल, बिहार में नीतीश कांग्रेस से गठबंधन से कन्नी काट रहे हैं, लेकिन दक्षिण भारत से कांग्रेस को कहीं कोई समस्या नहीं है. तमिलनाडु में डीएमके के साथ कांग्रेस की अलायंस वाली बातचीत 28 जनवरी से शुरू हो जाएगी. अलायंस पर बातचीत करने मुकुल वासनिक, अशोक गहलोत, सलमान खुर्शीद वाली अलायंस कमेटी चेन्नई जाएगी और डीएमके मुख्यालय में सीट शेयरिंग पर बात करेगी.

डीएमके चीफ एमके स्टालिन और राहुल गांधी का दोस्ताना गजब का है. राहुल गांधी ने जब भारत जोड़ो यात्रा शुरू की तब स्टालिन ने कन्याकुमारी आकर राहुल की यात्रा को झंडी दिखाई थी. स्टालिन की शराफत भी कमाल की है. डीएमके इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के बाद 24 सांसदों के साथ तीसरी सबसे पावरफुल पार्टी है लेकिन स्टालिन ने कभी भी न पीएम के लिए दावेदारी पेश की न कभी INDIA के संयोजक या चेयरमैन की रेस में शामिल हुए.

2019 के फॉर्मूले पर ही लड़ना चाहती है कांग्रेस

डेक्कन हेरल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस चाहती है कि 2019 के सीट शेयरिंग फॉर्मूला ही 2024 में भी लागू हो. कांग्रेस ने 9 सीटें लड़कर 8 सीटें जीती थी. 2021 में डीएमके ने ये कहकर कांग्रेस को सिर्फ 25 सीटें दी थी कि ये राज्य का चुनाव है. ज्यादा से ज्यादा सीटें लड़ने में ही डीएमके का फायदा है. तब कांग्रेस मान गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस वजन बनाए रखना चाहती है. पुद्दुचेरी की सीट भी कांग्रेस ने जीती थी इसलिए वो भी उसके कोटे में रहेगी.

सालों पुराना है तमिलनाडु में कांग्रेस-डीएमके अलायंस

पूरे देश की राजनीति में इस समय सबसे पुराना अलायंस कांग्रेस और डीएमके का है जो अभी तक चल रहा है. पहली बार 2004 में सोनिया गांधी और करुणानिधि ने मिलकर अलायंस बनाया था. 2004, 2006, 2009, 2019 और 2021 में अलायंस की जीत हुई. जब अलग रहे तो फायदा AIADMK को हुआ. 2014 में अलायंस नहीं होने से जयललिता ने अकेले AIADMK को 37 सीटें जीता दी थी. 2019 तक न तो करुणानिधि रहे, न जयललिता. स्टालिन-राहुल गांधी ने मिलकर तमिलनाडु से बीजेपी के एनडीए को दूर रखा.

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2019 के चुनाव में भी कांग्रेस-डीएमके साथ मिलकर लड़े थे, उसमें भी तहलका मचाया था. तमिलनाडु में सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस है, जिसमें डीएमके, कांग्रेस, लेफ्ट के साथ 9 पार्टियां हैं. 39 में से 38 सीटें अलायंस ने जीती थी. अकेले डीएमके ने 24, कांग्रेस ने केरल के बाद सबसे ज्यादा 8 सीटें तमिलनाडु से जीती थी. तमिलनाडु में बीजेपी के एनडीए में 11 पार्टियों शामिल हैं, लेकिन बीजेपी को जीरो और सहयोगी पार्टी AIADMK को सिर्फ एक सीट मिली थी.

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ऐसी ही धाक 2 साल बाद 2021 में विधानसभा चुनाव में भी जमाई. 234 में से डीएमके-कांग्रेस ने मिलकर 151 सीटें जीत लीं.

तमिलनाडु में कारगर नहीं साबित हुई है मोदी लहर

प्रचंड मोदी लहर के बाद भी तमिलनाडु में दूसरी सबसे प्रभावशाली पार्टी AIADMK को साथ लेकर भी बीजेपी आजतक कोई कमाल नहीं कर सकी. बीजेपी के न चाहने पर भी पिछले दिनों AIADMK ने बीजेपी से अलायंस तोड़ा और उसका जश्न भी मनाया. इस बार तमिलनाडु में बीजेपी के साथ कोई दमदार सहयोगी नहीं है. वैसे स्टालिन ये बात खुलेआम कहते हैं कि, तमिलनाडु के लोगों ने कभी मोदी के लिए वोट नहीं डाला और आगे भी नहीं डालेंगे.

ओपिनियन पोल में डीएमके और कांग्रेस की प्रचंड जीत

इस बार तमिलनाडु डीएमके और कांग्रेस के लिए बहुत मौका है. लोकसभा चुनाव के लिए जो ओपिनियन पोल आए उसमें भी डीएमके-कांग्रेस की प्रचंड जीत का अनुमान लगाया गया है. दिसंबर में टाइम्स नाउ-ईटीजी के ओपिनियन पोल में अनुमान लगाया कि डीएमके-कांग्रेस का गठबंधन 39 में से 36 सीटें तक जीत सकता है. डीएमके को 20 से 24, कांग्रेस को 10 से 12, AIADMK को 3 से 6 औऱ बीजेपी को एक सीट मिल सकती है. अक्टूबर में इंडिया टीवी सीएनएक्स के ओपिनियन पोल में का ट्रेंड लगभग ऐसा ही है.

हालांकि डीएमके से इस बार कांग्रेस को थोड़ा झटका भी लग सकता है. पिछले दिनों सनातन धर्म पर स्टालिन के बेटे उदयनिधि के बेधड़क अनाप-शनाप बयानबाजी की थी. बीजेपी ने इसको जमकर मुद्दा बनाया. इसी बात से कांग्रेस को थोड़ा दिक्कत जरूर हो सकती है, लेकिन दोनों पार्टियों ने उदयनिधि के बयान को अलायंस के आड़े नहीं आने दिया.

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