शांतिनिकेतन के विश्वभारती विश्वविद्यालय में मोदी नाम की पट्टी का विवाद क्या है?

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स्मारक पर कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का नाम ने होने पर विवाद, पीएम मोदी और वाइस चांसलर का नाम है स्मारक पर
स्मारक पर कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का नाम ने होने पर विवाद, पीएम मोदी और वाइस चांसलर का नाम है स्मारक पर
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शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगालः रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेत के विश्वभारती विश्वविद्यालय में लगे स्मारक को लेकर विवाद छिड़ गया है. स्मारक में पीएम मोदी और कुलपति विद्युत चक्रवर्ती के नाम की पट्टी लगाई गई है. पीएम मोदी इस विश्वविद्यालय के चांसलर (आचार्य) भी हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस रविंद्रनाथ टैगोर का अपमान बताया है. उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीति मुद्दा बना दिया है. उसके कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं. आइए इस पूरे विवाद को समझते हैं.

इसी साल सितंबर में यूनेस्को ने शांतिनिकेतन को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (विश्व धरोहर सूची) में शामिल किया है. शांतिनकेतन, भारत की 41वीं धरोहर है, जिसे इस सूची में जगह मिली है. इसे लेकर विश्वविद्यालय में तीन नए स्मारक लगाए गए हैं. इनमें विश्वविद्यालय के चांसलर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाइस-चांसलर विद्युत चक्रवर्ती का नाम लिखा है. स्मारक में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का नाम नहीं है. यही विवाद की जड़ है. शांतिनिकेतन को रवींद्रनाथ टैगोर की वजह से ही जाना जाता है. शांतिनिकेतन की स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने की थी.

विवाद पर कुलपति ने दी ये सफाई

टैगोर को लेकर विवाद बढ़ा, तो बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कुलपति से जवाब मांग लिया. राज्यपाल इस विश्वविद्यालय के रेक्टर (प्रधान) हैं. सूत्रों के मुताबिक कुलपति ने सफाई में कहा है कि उन्होंने स्मारकों पर लिखे जाने वाले टेक्स्ट के लिए भारत सरकार के पुरातत्व विभाग से अनुमति मांगी थी.

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क्या है शांतिनकेतन की कहानी

शांतिनिकेतन की स्थापना गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के पिता देवेंद्रनाथ टैगोर ने की थी.
शांतिनिकेतन, फोटोःइंडिया टुडे

बंगाल और टैगोर का नाम सुनते ही कलकत्ता (अब कोलकाता) ध्यान में आता है. लेकिन, शांतिनिकेतन कोलकाता में नहीं पश्चिम बंगाल के “लाल माटी के देश” कहे जाने वाले बीरभूम जिले के बोलपुर में स्थित है. बोलपुर राजधानी कोलकाता से करीब 200 किलोमीटर दूर है. बोलपुर और शांतिनिकेतन अब एक दूसरे का पर्याय बन चुके हैं. शांतिनिकेतन को स्थापित करने के लिए रवींद्रनाथ टैगोर के पिता ने 1863 में 5 रुपए की सालाना दर पर 20 एकड़ जमीन किराए पर ली थी.

भले ही शांतिनिकेतन आश्रम की स्थापना उनके पिता ने की हो, लेकिन इसको विश्वपटल पर लाने का श्रेय कविगुरु रवींद्रनाथ को ही जाता है. टैगोर ने ही शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. गुरुदेव रवींद्रनाथ ने इस विश्वविद्यालय के लिए अपनी पूरी संपत्ति दान दे दी थी. साल 1951 में इसने केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल किया था

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