CPI ने बढ़ाई टेंशन पर कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए क्यों इतनी जरूरी है वायनाड की ही सीट? 

अभिषेक गुप्ता

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Wayanad Lok Sabha Seat: कांग्रेस नेता राहुल गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं. आगामी लोकसभा चुनाव में राहुल के यहां से उम्मीदवार बनने पर सस्पेंस अभी भी बरकरार है. आपको बता दें कि वायनाड के साल 2009 लोकसभा सीट बनने के बाद से अबतक हुए तीनों चुनाव में कांग्रेस ने बड़े मार्जिन से यहां जीत हासिल की है. 2019 के चुनाव में तो राहुल गांधी ने सीपीआई के उम्मीदवार को लगभग चार लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. यही वजह है कि अक्सर ऐसी चर्चाएं सामने आती हैं कि कांग्रेस उन्हें फिर से वायनाड से चुनाव लड़ाना चाहती है. लेकिन वायनाड से सीपीआई के उम्मीदवार उतारने के बाद मामला फंस गया है. केरल की सत्ता पर काबिज वामपंथी दलों के फ्रंट की मुख्य पार्टी सीपीआई के महासचिव डी. राजा. की पत्नी एनी राजा को वायनाड से उम्मीदवार बनाया गया है. सीपीआई विपक्ष के इंडिया गठबंधन में भी शामिल है. सीपीआई ने सवाल उठाया है कि आखिर राहुल गांधी देश की दूसरी लोकसभा सीट से भी तो चुनाव लड़ ही सकते हैं, वह गठबंधन पार्टनर के लिए यह सीट छोड़ क्यों नहीं देते? 

ऐसे सवालों, दावों के बीच लोगों में वायनाड सीट पर चुनाव को लेकर और भी दिलचस्पी जागने लगी है. वायनाड से सीपीआई उम्मीदवार एनी राजा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा हैं कि, 'केरल से चुनाव लड़ने में कांग्रेस या राहुल गांधी को क्या फायदा है? कांग्रेस के पास अपने नेतृत्व(राहुल गांधी) के लिए सुरक्षित सीट के लिए कई विकल्प हैं. यह तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक कई जगहों पर हो सकता है.' एनी राजा के इस बयान का मतलब साफ ये था कि, कांग्रेस अपने ही सहयोगी पार्टी के खिलाफ केरल में चुनाव क्यों लड़ेगी, उसे बीजेपी के खिलाफ लड़ना चाहिए. 

केरल में कांग्रेस-यूडीएफ साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव  

वैसे बीते दिन यानी बुधवार को कांग्रेस ने ये घोषणा कर दी है कि, वह अपने यूडीएफ गठबंधन के हिस्से के रूप में केरल में 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. हालांकि पार्टी ने अभी किसी उम्मीदवार की घोषणा नही की है. जानकारी ये भी है कि, कांग्रेस की केरल राज्य इकाई चाहती है कि राहुल गांधी फिर से वायनाड से चुनाव लड़ें. 2019 में इस सीट ने उत्तर प्रदेश में पारिवारिक गढ़ अमेठी से बीजेपी की स्मृति ईरानी से हार के बाद राहुल गांधी को संसद में पहुंचाया था. इसके अलावा राहुल की मौजूदगी ने केरल में कांग्रेस के ग्राफ को भी ऊंचा कर ज्यादा सीट जिताने में मदद की थी.  

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वायनाड में कांग्रेस का प्रदर्शन 

वायनाड में हुए साल 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस नेता एमआई शनावास ने चुनाव जीता था. हालांकि वो अब नहीं रहे. 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने 50 फीसदी वोट तो सीपीआई ने 31 फीसदी वोट पाए थे. 2014 के चुनाव में वोटों का अंतर थोड़ा कम हुआ था, इस चुनाव में कांग्रेस ने 42 फीसदी तो सीपीआई ने 39 फीसदी वोट पाए थे. वहीं अगर बात पिछले यानी 2019 के लोकसभा चुनाव की करें तो राहुल गांधी के उम्मीदवार बनने से कांग्रेस के पक्ष में जमकर वोटिंग हुआ. इस चुनाव में राहुल गांधी को लगभग 65 फीसदी वोट मिलें वहीं सीपीआई को सिर्फ 25 फीसदी वोट मिला था.  

कांग्रेस के लिए सेफ सीट है वायनाड

वायनाड में हुए पिछले 2009, 2014 और 2019 के चुनाव को देखें, तो 2014 के चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच पिछले तीन चुनावों की तुलना में सबसे करीबी मुकाबला देखने को मिला, लेकिन फिर भी कांग्रेस प्रत्याशी के जीत का मार्जिन 20987 वोटों का था. वहीं पिछली बार राहुल के जीत का मार्जिन चार लाख से ज्यादा वोटों का था. वहीं प्रदेश में 2021 में हुए विधानसभा के चुनाव में भी कांग्रेस को वायनाड के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में 34.5 फीसदी का अच्छा खासा वोट शेयर मिला था. 

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इन आंकड़ों से हमें ये साफ नजर आता हैं कि, वायनाड की सीट कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के लिए कितनी सेफ है. पिछले चुनाव में अमेठी में स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करने के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ये कभी नहीं चाहेगी कि, उसे फिर कभी ऐसे दिन देखने पड़े. दूसरी बात ये भी है कि कांग्रेस पार्टी दक्षिण भारत के राज्यों में उत्तर के राज्यों की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है. अगर राहुल गांधी दक्षिण के राज्य से चुनाव लड़ते हैं तो उसका फायदा निश्चित रूप से पार्टी को मिलेगा. यही वजह है कि पार्टी राहुल गांधी को वायनाड से उम्मीदवार बनाना चाहती है. 

कुल मिलाकर कांग्रेस को राहुल गांधी के लिए वायनाड एक सेफ सीट नजर आ रही है. पार्टी ये चाहती भी है कि, वो यहीं से चुनाव लड़ें. हालांकि पिछली बार अमेठी से बीजेपी के हाथों मिली हार और अब सोनिया गांधी के रायबरेली सीट छोड़ने के बाद ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि, रायबरेली सीट से गांधी परिवार से ही कोई उम्मीदवार होगा. वैसे पार्टी की ओर से अभी तक इसपर कोई फैसला नहीं लिया गया है. अब ये देखना दिलचस्प होगा की आखिर कौन-कहां से उम्मीदवार बनता है.

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