नीतीश और तेजस्वी की बीच खाली कुर्सी! बिहार में खेला की चर्चाओं के बीच समझिए किसका क्या प्लान

अभिषेक गुप्ता

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Bihar News: बिहार में तेजी से बदल रही सियासत के बीच गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच की खाली कुर्सी काफी कुछ बयान कर रही है. माना जा रहा है कि नीतीश की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और लालू की राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राह अब अलग हैं, बस औपचारिक ऐलान होना ही बाकी है. चर्चा यहां तक है कि नीतीश कुमार 28 जनवरी को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि राजद की तरफ से भी तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर गुणा-गणित शुरू हो चुका है. बताया जा रहा है कि बिहार में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के सहयोगी हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (हम) के नेता जीतन राम मांझी से लालू की पार्टी संपर्क में है.

आखिर बिहार में क्या होने जा रहा है? आइए आपको लेटेस्ट सियासी डेवलेपमेंट से रूबरू कराते हैं.

अगले विधानसभा चुनाव तक अब बीजेपी के साथ नीतीश?

कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने जा रहे हैं. नीतीश कुमार अगले बिहार विधानसभा चुनाव यानी 2025 तक अब बीजेपी के सहयोग से सीएम बने रहने की तैयारी में हैं. जेडीयू और बीजेपी की सरकार के समय जो मंत्रिमंडल के विभागों का बंटवारे का फॉर्म्युला था, वो लागू रहेगा. नीतीश कुमार आरजेडी और कांग्रेस दोनों से नाराज़ बताए जा रहे हैं. नीतीश कुमार लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के ट्वीट से आहत हैं. इसमें रोहिणी ने बिना नाम लिए उनके बार-बार पलटने वाली सियासत पर परोक्ष रूप से निशाना साधा था. इसके अलावा नीतीश कांग्रेस की तरफ से बिहार या प्रदेशों में इंडिया ब्लॉक के गठबंधन के साथ सीट शेयरिंग पर फैसला नहीं लेने से भी नाराज बताए जा रहे हैं.

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नीतीश कुमार का मानना है कि चुनाव के समय राहुल गांधी अपनी पार्टी के लिए न्याय यात्रा निकाल रहे हैं ना कि इंडिया ब्लॉक गठबंधन के लिए. ऐसे में दूसरी पार्टियों के नेता राहुल गांधी की न्याय यात्रा में क्यों शामिल होंगे. कुल मिलाकर देखें, तो नीतीश को लगता है कि उनके पास नाराजगी की पर्याप्त वजहें हैं.

लालू खेमे से जीतन राम मांझी के बेटे को डिप्टी सीएम पोस्ट का ऑफर!

इधर चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद यादव अभी इस लड़ाई में हार स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने अबकी बार राजद सरकार वाली सेटिंग बैठानी शुरू कर दी है. राजद के पास 79 सीटें हैं, कांग्रेस की 19 और लेफ्ट की 16 सीटें मिला दें तो यह आंकड़ा 114 सीटों तक पहुंचता है. बिहार में विधानसभाकी 243 सीटें हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 122 सीटों का है. यानी लालू खेमे के पास 6 सीटें कम हैं. जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ के पास 4 सीटें हैं. लालू खेमे ने उनके बेटे संतोष मांझी को डिप्टी सीएम पोस्ट का ऑफर दिया है. इसके अलावा महाठबंधन में आने पर लोकसभा चुनावों में 2-3 सीटें देने का भी ऑफर है.

कुल मिलाकर बिहार में सियासत का चौसर एक बार फिर सज चुका है. अगर नीतीश ने सियासत में फिर सफल पलटी मारी, तो ये 9वीं बार होगा जब वह बिहार के सीएम पद की शपथ लेंगे. नजरें तेजस्वी पर भी टिकी हैं. बिहार में क्या होने जा रहा है, यह अब कुछ घंटों या एक-दो दिन में ही साफ हो जाना है.

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