सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर बनेंगे अगले लोकपाल, जानें इनकी कहानी

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Justice Ajay Manikrao Khanvilkar: सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर को देश का लोकपाल बनाने पर मुहर लग गई है. जानकारी के मुताबिक बीते बुधवार को ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी की उच्चस्तरीय समिति ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी. नियुक्ति के बाद खानविलकर देश के दूसरे लोकपाल होंगे. भारत में लोकपाल संस्था बनने के बाद से साल 2019 में जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष भारत के प्रथम लोकपाल बने थे जिनका कार्यकाल 2022 में ही समाप्त हो चुका है.

कौन हैं जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर

जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में 30 जुलाई 1957 को हुआ है. उन्होंने मुलुंड कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन और केसी लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून की डिग्री हासिल की है. विकिपीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, 9 मार्च 2000 को खानविलकर को बॉम्बे हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, वहीं 8 अप्रैल 2002 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिली. साल 2013 में उन्हें हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. इसके बाद वो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के भी मुख्य न्यायाधीश रहें. 13 मई 2016 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया. तबसे 6 साल, 2 महीने और 17 दिन तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवा देने के बाद 29 जुलाई 2022 को वो सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे.

जस्टिस खानविलकर कई प्रमुख निर्णयों में रहें हैं शामिल

जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने धन-शोधन निवारण एक्ट(PMLA) में संसोधन, जिसके तहत इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (ED) की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को नए सिरे से परिभाषित किया गया था, के साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए गए. जस्टिस खानविलकर ने उस पीठ का भी नेतृत्व किया, जिसने 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री और निर्णय सुनाते समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिया था. इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी को दंगा-फसाद और हिंसा में फंसाने के लिए मनगढ़ंत सबूत पेश करने के लिए याचिकाकर्ता तीस्ता सीतलवाड पर सवाल भी उठाए थे.

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दिल्ली के सेंट्रल विस्टा और नए संसद भवन के निर्माण पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों के द्वारा कई आपत्तियां उठाने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. जस्टिस खानविलकर ने SC की उस पीठ का भी नेतृत्व किया था, जिसने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सेंट्रल विस्टा और नए संसद भवन के निर्माण का रास्ता साफ किया था.

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