बारामती में ननद-भौजाई की लड़ाई, क्या इस बार टूट जाएगा शरद पवार का किला? 

अभिषेक गुप्ता

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Baramati Lok Sabha seat: महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट पर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है. वैसे इस सीट के चर्चा में होने की वजह भी दिलचस्प ही है. बारामती को शरद पवार का वैसे ही गढ़ माना जाता है, जैसे अमेठी और रायबरेली को गांधी परिवार का. शरद पवार ने जबसे सियासी पारी की शुरुआत की है तबसे बारामती पर उनका कब्जा रहा है. उन्होंने 1984, 1996, 1998, 1999 और 2004 में यहीं से लोकसभा चुनाव जीता था. फिर ये सीट उन्होंने भतीजे और बेटी को सौंप दिया. हालांकि इस बार यहां का मामला डामाडोल लग रहा है. पिछले साल अजित पवार अपने चाचा शरद पवार का विरोध करते हुए पार्टी में फूट कर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार में शामिल हो गए थे. फिर पार्टी को लेकर कोर्ट में केस चला और असली NCP अजित पवार को मिल गई. पार्टी को बनाने और खड़ा करने वाले शरद पवार देखते ही रह गए. 

पार्टी पर कब्जा जमाने के बाद अब अजित पवार बारामती पर भी अपना कब्जा जमाने की फिराक में है. शरद पवार ने अपनी बेटी और बारामती से वर्तमान सांसद सुप्रिया सुले को फिर से चुनाव लड़ा रहे हैं वहीं अजित पवार भी यहां अपना मजबूत दावा ठोंकते हुए अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा है. यानी महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. देखने में तो ये ननद-भौजाई का ही झगड़ा लगता है, जो घर के आंगन से निकलकर अब चुनावी मैदान में पहुंच चुका है और इस झगड़े में एक पिता और ससुर की राजनीतिक विरासत दांव पर लगी हुई है.

बारामती पर कब्जे की है लड़ाई

बारामती लोकसभा सीट के लिए मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार दोनों ने ही नामांकन दाखिल कर दिया है. सुप्रिया सुले जहां शरद पवार की बेटी हैं वहीं सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी हैं, यानी शरद पवार की बहू हैं. ये लोकसभा चुनाव बारामती में शरद पवार की राजनीतिक विरासत पर काबिज होने की लड़ाई है. अजित पवार की राजनीति भी शरद पवार के परिवार से होने के कारण ही चलती आई है. हालांकि इसमें नई बात ये हुई है कि अजित पवार ने भी शरद पवार को वैसे ही झटका दिया है, जैसे एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को दिया. और शिंदे सेना की तरह अजित पवार भी NCP पर काबिज हो गये हैं. 

नामांकन में नहीं दिखे चाचा-भतीजा 

महायुति गठबंधन की तरफ से उम्मीदवार सुनेत्रा पवार के नामांकन के वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के अलावा प्रफुल्ल पटेल और बीजेपी के संकटमोचक RPI नेता रामदास अठावले मौजूद थे. वहीं महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार के रूप में नॉमिनेशन फाइल करने पहुंची सुप्रिया सुले के साथ शरद पवार के हिस्से वाली NCP के नेता डॉ. अमोल कोल्हे और अजित पवार के भतीजे युगेंद्र पवार भी थे. बता दें कि, युगेंद्र पवार अपने चाचा अजित पवार को छोड़ कर शरद पवार खेमे के साथ खड़े हैं.

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नामांकन में दिलचस्प बात ये रही कि, सुनेत्रा पवार के नामांकन के दौरान न तो अजित पवार साथ गये थे और सुप्रिया सुले के नामांकन के समय उनके पिता शरद पवार भी नही पहुंचे थे. इसपर ये कयास लगाए जा रहे थे कि, क्या इन दोनों नेताओं ने एक दूसरे के सामने आने से बचने की कोशिश थी, या दोनों अपने परिवार के सदस्यों को सामने विरोधी खेमे में खड़े देखने से परहेज कर रहे थे?

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