देश में करीब 97 करोड़ वोटर्स, इनमें 2 करोड़ युवा भी, BJP के मिशन 370 का राज यहीं छिपा है

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Lok Sabha Election 2024: पिछले दिनों चुनाव आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव में भागीदारी करने वाले मतदाताओं के आंकड़े जारी किए. ECI के डेटा के मुताबिक भारत में रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या करीब 97 करोड़ हो गई है. यानी भारत में होने वाला आगामी चुनाव दुनिया में सर्वाधिक वोटर्स की भागीदारी वाला चुनाव बनने जा रहा है. मतदाताओं की सूची में 1.41 करोड़ महिलायें और लगभग दो करोड़ से ज्यादा नए युवा मतदाता जुड़े हैं. उधर पीएम मोदी ने संसद में बोलते हुए दावा किया है कि देश इस बार बीजेपी को 370 सीट से कम क्या देगा. असल में वो बीजेपी के कैडर को एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य दे रहे हैं. ये लक्ष्य कठिन जरूर है पर विश्लेषक इसे असंभव नहीं मानते.

मतदाताओं के नजरिए से बीजेपी की पिछली चुनावी यात्राओं में ऐसा क्या हासिल है जो वो इतने महत्वाकांक्षी लक्ष्य बना रही है? क्या बीजेपी के पास वोटर्स आधार इतना बड़ा है जो उसे यह लक्ष्य हासिल हो जाए? बीजेपी के इन लक्ष्यों के सापेक्ष कांग्रेस कहां खड़ी है? आइए समझते हैं.

इसे समझने से पहले हमें हाल के वर्षों में हुए चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस को मिले वोटों पर गौर करना होगा.

हम लोकसभा चुनाव 2004 से लेकर 2019 तक की इन दोनों दलों की सियासी यात्रा पर एक नजर डालते हैं. साल 2004 के लोकसभा चुनावों में कुल रजिस्टर्ड मतदाता 67.14 करोड़ थे. उनमें से 38.99 करोड़ लोगों ने वोट किया. जिसमें कांग्रेस को 10.34 करोड़ वोट मिले. तो बीजेपी को 8.63 करोड़ वोट मिले. तब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) बनाकर कांग्रेस ने सरकार बनाई.

साल 2009 के लोकसभा चुनावों को देखें तो 71.69 करोड़ कुल मतदाता रजिस्टर्ड थे. जिसमें से 41.73 करोड़ लोगों ने मतदान किया. जिसमें से कांग्रेस को 11.91 करोड़ तो बीजेपी को 7.84 करोड़ वोट मिले. तब दोबारा कांग्रेस ने यूपीए गठबंधन में सरकार बनाई. कांग्रेस पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अपना वोटर बेस 1.57 करोड़ मतदाताओं का इजाफा कर पाई. वहीं बीजेपी का वोट करीब 79 लाख घट ही गया.

2014 से बदल गई पूरी तस्वीर

साल 2014 में कुल मतदाताओं की संख्या 83.40 करोड़ थी. जिसमें से 55.41 करोड़ मतदाताओं ने वोट किया. जिसमें बीजेपी को 17.16 करोड़ तो कांग्रेस ने 10.69 करोड़ वोट हासिल किए. यानी बीजेपी ने अपने वोट में 9.32 करोड़ नए मतदाता जोड़े, जबकि कांग्रेस के 1.22 करोड़ मतदाता घट गए.

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यही ट्रेंड 2019 के चुनाव में भी देखने को मिला. साल 2019 के लोकसभा चुनावों में रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 91.19 करोड़ थी. जिसमें से 61.46 करोड़ लोगों ने मतदान किया. बीजेपी को 22.90 करोड़ तो कांग्रेस को 11.94 करोड़ वोट मिले. पिछले चुनाव से बीजेपी ने 5.74 करोड़ अधिक वोटर जोड़े. कांग्रेस के लिए भी यह आंकड़ा बढ़ा पर उतना नहीं. कांग्रेस के 1.25 करोड़ वोटर बढ़े.

2004 से 2019 के बीच इन 15 सालों में बीजेपी और कांग्रेस के वोटर के बीच के अंतर पर एक नजर डालिए. आप देखेंगे कि कैसे बीजेपी का वोटर बढ़ा है और कांग्रेस अपने वोटर बेस को बढ़ाने में असमर्थ रही है.

कांग्रेस को 2004 में 10.34 करोड़ वोट मिले थे. जो 2019 में बढ़कर 11.94 करोड़ हुए. यानी 15 सालों में कांग्रेस सिर्फ 1.6 करोड़ नए वोटर्स को ही अपने साथ जोड़ पाई. 2004 में बीजेपी को जहां 8.63 करोड़ वोट मिला था जो 2019 में बढ़कर 22.90 करोड़ पहुंच गया. यानी करीब 14.27 करोड़ वोटर्स की बढ़ोतरी हुई. बीजेपी के वोटर बेस में अपने कोर मतदाता से भी ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली.

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इस बार बीजेपी ने बनाया 35 करोड़ वोट का लक्ष्य

भाजपा ने इस बार 35 करोड़ वोट हासिल करने का लक्ष्य बनाया है. इसके लिए अलग अलग कैंपेन चल रहे हैं. बूथ से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक. इस आंकड़े को ऐसे समझें की बीजेपी चाहती है कि उसे 2024 के चुनाव में 2019 के मुकाबले करीब 12 करोड़ अधिक वोट मिलें. जितना अधिक पाने का बीजेपी ने लक्ष्य बनाया है उतने वोट तो कांग्रेस को 2019 के चुनाव में ही नहीं मिले. जाहिर तौर पर यह एक कठिन लक्ष्य है.

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बीजेपी के मतदाता कौन?

दिल्ली बेस्ड थिंकटैंक सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) और लोक नीति के सर्वे के मुताबिक, बीजेपी की चुनावी जीत में महिलाओं और युवा मतदाताओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है. जैसे- जिस किसी राज्य में भी बीजेपी सरकार बना रही है वहां बीजेपी के पक्ष में महिलाओं के वोट प्रतिशत में लगातार इजाफा हो रहा है. इसको हम उत्तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव पर CSDS-लोकनीति के सर्वे से समझ सकते हैं. सर्वे ये कहता है कि, UP के वो वोटर्स जिन्हें कैश ट्रांसफर (DBT) का लाभ मिला उनमें 53 फीसदी ने बीजेपी गठबंधन को वोट किया, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) गठबंधन को 29 फीसदी और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को 13 फीसदी वोट गया. इसी तरह फ्री राशन पाने वाली महिला वोटर्स का 47 फीसदी वोट बीजेपी के खाते में गया. वहीं SP को 32 और बीएसपी को 14 फीसदी ऐसी महिला लाभार्थियों के वोट गए.

महिला और युवा मतदाताओं पर बीजेपी की नजर

बीजेपी ने अपनी सरकार में महिला और युवा मतदाताओं को टारगेट करने के लिए कई ऐसी योजनाएं चलाई है, जिससे उनको अपने पाले में किया जा सके. जैसे- उज्जवला स्कीम, फ्री राशन, हर घर जल और मातृत्व वन्दना योजना. इन योजनाओं से महिलाओं के दैनिक जीवन में सुधार हुआ है जिससे वो बीजेपी को वोट कर रही हैं. वैसे आजकल ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर योजनाओं को पेश किया जा रहा है जिसका अच्छा-खासा प्रभाव महिला मतदाताओं पर देखा जा रहा है. अगर युवाओं के लिए सरकार के प्रयासों की बात करें, तो पीएम मुद्रा योजना, रोजगार योजना, कौशल विकास योजना और सरकार की सबसे फ्लैगशिप स्कीम स्टार्टअप योजना है.

हाल के दिनों में चुनाव में एक लाभार्थी वर्ग निकल कर सामने आया है. ये वो वर्ग है जो सरकार की योजनाओं का लाभ उठा रहा है. मोदी सरकार ने योजनाओं का लाभ उठा रहे लोगों के साथ न सिर्फ कनेक्ट को बढ़ाया, बल्कि लाभार्थियों के बेस को भी विस्तार दिया है. जिससे उनके वोटों में और बढ़ोतरी होने की संभावनाओ को बल मिलता है.

कांग्रेस क्या कर रही है?

कांग्रेस देश में पिछले 10 सालों से सत्ता में नहीं है. देश में हुए आज तक के चुनावी इतिहास को देखें, तो पिछले दो चुनाव में कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. पार्टी 2014 के चुनाव में 44 सीटें, तो वहीं 2019 के चुनाव में 52 सीटें जीतने में कामयाब हो पाई थी. 2014 में अपनी हार से सबक लेते हुए कांग्रेस 2019 के चुनाव में ‘न्याय स्कीम’ लेकर आई थी. इस स्कीम में देश के एक निश्चित आयवर्ग के परिवार को 72000 रुपए सालाना की रकम उनके खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर करने की बात थी..चुनाव में कांग्रेस की इस योजना का प्रभाव लगभग न के बराबर ही देखने को मिला.

अब कुछ ही दिनों में देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसी के मद्देनजर देश के पूर्वोत्तर से पश्चिम तक ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ निकाले हुए हैं. इससे पहले वे दक्षिण से उत्तर तक की यात्रा कर चुके हैं. राहुल गांधी अपनी रैलियों में संख्या पर हिस्सेदारी यानी जातिगत जनगणना कराकर हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने, न्याय, रोजगार और गारंटियों की बात करते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक से इतर ओबीसी मतदाताओं पर भी फोकस कर रही है. कोशिश यही है कि नए मतदाता पार्टी के साथ जुड़ें.

कांग्रेस भले कह रही हो कि राहुल गांधी की न्याय यात्रा राजनीतिक नहीं है लेकिन इसमें भी वोटों का नंबर गेम ही छिपा है. राहुल गांधी देश में पूरब से पश्चिम की इस बार की यात्रा में नए वोटर्स समूह से कनेक्ट होने और उन्हें कांग्रेस की ओर खींचने में लगे हैं. लोगों के जीवन स्तर में बदलाव नहीं आना, महंगाई, बेरोजगारी, महंगे इलाज जैसे मुद्दे उठाकर कांग्रेस देश के एक बड़े तबके तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

अब लोक सभा चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं बचा है. कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष का इंडिया गठबंधन भी है जो हाल के दिनों में अपने दो साथी नीतीश कुमार और जयंत चौधरी को गंवा चुका है. इसके बावजूद कांग्रेस, सपा, लेफ्ट पार्टी, तृणमूल, आम आदमी पार्टी जैसे दलों की कोशिश है कि इंडिया गठबंधन बना रहे और बीजेपी के एनडीए का मुकाबला करे. ऐसे में ये देखना रोचक होगा कि देश में तेजी से बढ़े नए मतदाताओं को अपनी ओर खींचने में कौन ज्यादा कारगर साबित होता है.

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