पेंटांगन से भी बड़ा है गुजरात का यह कॉरपोरेट ऑफिस हब , क्या है ‘सूरत डायमंड बोर्स’ की कहानी?

अभिषेक गुप्ता

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Surat Diamond Bourse
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Surat Diamond Bourse: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरत में विश्व के सबसे बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस हब ‘सूरत डायमंड बोर्स’ का उद्घाटन किया है. डायमंड मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक प्रसिद्धि हासिल करने के बाद अब सूरत डायमंड ट्रेडिंग हब के तौर पर पहचाना जाएगा. डायमंड बोर्स दुनिया के कोने-कोने से सूरत आने वाले हीरा खरीदारों के लिए एक वैश्विक मंच होगा. पर इस प्रोजेक्ट के साथ एक विवाद भी जुड़ा है. आइए जानते हैं.

सूरत पूरी दुनिया में डायमंड हब के रूप में माना जाता है. अभी तक दुनिया के अलग-अलग देशों में डायमंड भेजने के लिए सूरत के कारोबारियों को मुंबई में अपना ऑफिस खोलना, ऑफिस स्टाफ रखना पड़ता था. इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने के चलते मुंबई से ही कारोबार करना पड़ता था. अब सूरत डायमंड बोर्स में वे सारी सुविधाएं हैं, जो किसी डायमंड कारोबारी को चाहिए.

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क्या है सूरत डायमंड बोर्स?

‘सूरत डायमंड बोर्स’ 3400 करोड़ की लागत से 35.54 एकड़ विशाल जगह में नवनिर्मित है. यहां रफ और पॉलिश्ड डायमंड ट्रेडिंग के लिए ग्लोबल सेंटर बनेगा, इसके बनने से 1.5 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. यह विश्व की सबसे बड़ी इंटरकनेक्ट बिल्डिंग होगी जो अमेरिका के पेंटागन से भी बड़ी बिल्डिंग है. यहां 67 लाख स्क्वायर फीट में बने 4500 से ज्यादा ऑफिस एक दूसरे के साथ इंटर-कनेक्टेड होंगे. 4200 व्यापारी एक साथ मिलकर इस वर्ल्ड क्लास प्रोजेक्ट को साकार करेंगे.

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यह हीरे और आभूषण व्यवसाय के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक केंद्र के साथ ही कच्चे और पॉलिश किए गए हीरों के साथ-साथ आभूषणों के व्यापार का भी केंद्र होगा. एक्सचेंज में आयात-निर्यात के लिए अत्याधुनिक ‘सीमा शुल्क निकासी सुविधा’, खुदरा आभूषण व्यवसाय के लिए कच्चा माल, अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग और सुरक्षा वाल्व की सुविधा शामिल होगी.

मुंबई से सूरत शिफ्ट करने पर था विवाद

सूरत डायमंड बोर्स के शुरू होने से पहले डायमंड का पूरा कारोबार मुंबई से चलता था. अब सूरत में डायमंड हब बनने के साथ ही मुंबई में डायमंड कारोबार से जुड़े करीब 1000 से ज्यादा दफ्तर हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे. इससे मुंबई और महाराष्ट्र सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स का घाटा होगा.राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार ने पिछले दिनों इसका विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि इससे महाराष्ट्र को बहुत नुकसान होगा. लाखों लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा. वैसे यह विवाद कोई बड़ा रूप नहीं अख्तियार कर पाया.

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