कल राहुल गांधी ने कहा ममता से हमारे अच्छे संबंध, आज ‘दीदी’ ने बोल दिया- हम बंगाल में अकेले लड़ेंगे

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Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस(TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने विपक्षी गठबंधन INDIA को बड़ा झटका दे दिया है. ममता ने आज कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि, हम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा चुनाव से पहले ममता का ये ऐलान कांग्रेस के लिए बड़ा झटका हो सकता है. राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा कल बंगाल में प्रवेश करने वाली है उससे पहले ममता की ये घोषणा पार्टी के लिए गंभीर विषय है. अभी कल ही राहुल एक जंसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि मेरे और ममता के बीच अच्छे संबंध है लेकिन आज ममता ने उन्हें दगा दे दिया. आइए आपको बताते हैं ममता के इस फैसले के क्या है मायने किसे होगा फायदा और किसे होगा नुकसान.

पहले जानिए ममता ने क्या-क्या कहा

ममता ने आज कहा कि, मैंने पहले ही अलायंस में कहा था कि, क्षेत्रीय दलों को अपने क्षेत्र में भाजपा का मुकाबला करने दें और कांग्रेस को 300 सीटों पर भाजपा से लड़ने दें. हालांकि अगर वे हस्तक्षेप करते हैं तो हमें भी पुनर्विचार करना होगा. उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि, मैंने कांग्रेस को जो भी प्रस्ताव दिया, उन्होंने सभी को अस्वीकार कर दिया. अब से हमने बंगाल में अकेले जाने का फैसला किया है. वहीं ममता ने राहुल की भारत जोड़ो यात्रा के संदर्भ में कहा कि, मुझे अभी तक किसी ने सूचित भी नहीं किया है कि वे बंगाल में यात्रा निकालने जा रहे हैं. यही तो कांग्रेस पार्टी का शिष्टाचार है. हालांकि इन सब बातों के बाद भी ममता ने कहा कि, वे INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं.

ममता के इस बयान से ये तो साफ हो गया है कि वो आगामी लोकसभा चुनाव में बंगाल में अकेले लड़ेंगी. हालांकि वे और उनकी पार्टी राहुल की यात्रा में शामिल होंगी या नहीं ये देखने वाली बात होगी.

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कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के हेड जयराम रमेश ने ममता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, ममता के बिना INDIA गठबंधन की कल्पना नहीं की जा सकती, इसका रास्ता निकालेंगे. उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी का पूरा बयान है कि हम भाजपा को हराना चाहते हैं. ये एक लंबा सफर है. रास्ते में कभी-कभी स्पीड ब्रेकर आ जाते हैं, कभी-कभी हरी बत्ती आ जाती है. तृणमूल कांग्रेस INDIA गठबंधन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्तंभ है. हम ममता बनर्जी के बिना INDIA गठबंधन की कल्पना नहीं कर सकते हैं. कुछ न कुछ रास्ता निकाला जाएगा.’

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ममता के अकेले चुनाव लड़ने पर किसे होगा नफा-नुकसान

वैसे तो कांग्रेस कह रही है कि ममता बनर्जी और टीएमसी को लेकर कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा. पर बड़ा सवाल यही है कि अगर ममता बनर्जी ने 2024 का लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में अकेले लड़ा तो किसका नुकसान होगा? इस बात को समझने के लिए हमें 2019 के चुनावी नतीजों को एक नजर देखना होगा. 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 सीटों में ममता बनर्जी की टीएमसी को 22, बीजेपी को 18, कांग्रेस को 2 और सीपीआई (एम) को जीरो सीट मिली थीं. 2014 के हिसाब से देखें, तो ममता को 12 सीटों का नुकसान हुआ था. उस चुनाव में ममता की पार्टी ने 34 सीटें जीती थीं. बीजेपी का आंकड़ा 2 से 18 तक पहुंचा यानी उन्हें 16 सीटों का फायदा हुआ था.

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2019 के चुनाव में भी ममता बनर्जी अकेले लड़ी थीं. जब टीएमसी को 43.69 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी को 40.64 फीसदी, कांग्रेस को 5.67 फीसदी और लेफ्ट को 6.34 फीसदी वोट मिले. ममता और बीजेपी में वोटों का अंतर सिर्फ 3 फीसदी के आसपास रहा. साफ था कि तब विपक्ष के वोट बंट गए जबकि बीजेपी ने अपने वोट शेयर में जबर्दस्त इजाफा किया.

ममता इस बार भी अकेले लड़ीं, तो विपक्ष के वोटों में बंटवारे का खतरा तय है. बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में काफी आक्रामक पोजिशनिंग ले रखी है. कभी ममता बनर्जी के करीबी समझे जाने वाले सुवेंदु अधिकारी अभी बीजेपी से विधायक हैं और पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु ममता के खिलाफ आक्रामक बीजेपी का नेतृत्व कर रहे हैं.

ममता के अकेले लड़ने से होने वाले सियासी नफे-नुकसान को समझने के लिए हमने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स के फेलो प्रोफेसर संजय कुमार से बात की. उन्होंने कहा कि, अगर टीएमएस, कांग्रेस और लेफ्ट सारी सीटों पर अलग लड़े तो निश्चित तौर पर बीजेपी का फायदा है. लेकिन मैं ऐसा होते देख नहीं रहा. 2019 और 2024 में एक फर्क है. विपक्ष में वाम दल और कांग्रेस, इनके पास कोई खास वोट शेयर नहीं था. पिछली बार विपक्ष दूर दूर था. इस बार कहीं न कहीं अंडरस्टैंडिंग जैसा लग रहा है. कांग्रेस कम ही जगहों पर लड़ाई लड़ेगी. बीजेपी को 2019 जैसा मैंडेट पश्चिम बंगाल में मिलेगा, इसकी संभावना मैं कम ही देख रहा हूं.’

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