दोबारा शादी करने, तलाक और लीव इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है उत्तराखंड का UCC बिल

अभिषेक गुप्ता

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Uttarakhand Uniform Civil Code Bill: उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता(UCC) पर बड़ा कदम उठाते हुए आज विधानसभा में UCC के लिए बिल पेश कर दिया हैं. इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने UCC का मसौदा बनाने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार UCC के लिए बिल लाई है.
शादी, तलाक और लीव इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है UCC का यह मसौदा, हमने इसी बात की पड़ताल की हैं. आइए बताते हैं क्या-क्या है इस मसौदे में.

विवाह को लेकर ये है प्रावधान

उत्तराखंड सरकार के UCC बिल में विवाह की उम्र पुरुष के लिए 21 और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है. साथ ही यह भी लिखा गया है कि, विवाह एक पुरुष और एक महिला के बीच ही होगा, यानी मसौदे में सेम सेक्स मैरेज को कोई जगह नहीं दिया गया है. इसके पीछे सरकार ने देश की संस्कृति को बचाने का तर्क दिया है.

मसौदे में सरकार ने विवाह करने की विधियों में कोई छेड़-छाड़ नहीं किया है. यानी कोई भी व्यक्ति किसी भी पद्धति, परंपरा और प्रथाओं जैसे- सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, होली और यूनियन या आनंद कारज जैसी पद्धतियों से शादी कर सकता है. इससे पहले ऐसी बातें कही जा रही थी कि, UCC लागू होने के बाद सभी के लिए शादी की एकसमान प्रक्रिया होगी, जिसपर आपत्ति जताई जा रही थी.

पति या पत्नी के जिंदा होने की स्थिति में जब तक पूर्ण रूप से तलाक न हो गया हो तब तक नए विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया है. विधेयक में ऐसा प्रबंध किया गया है कि, इसके लागू होने के बाद से सरकार की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिन्होंने अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन कराया होगा.

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तलाक के लिए नए नियम

UCC बिल में पुरुष और महिला दोनों को तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का प्रावधान करता है. कुछ मामलों में महिलाओं के लिए तलाक मांगने के विशेष अधिकार भी दिए गए हैं जैसे- यदि पति बलात्कार या अप्राकृतिक यौन संबंध से संबंधित किसी अन्य अपराध का दोषी पाया गया है, यदि UCC लाए जाने से पहले पति की एक से अधिक पत्नियां हैं. अगर किसी महिला का तलाक होता है तो उसके बाद महिला को विवाह के लिए किसी प्रकार की शर्तों में बांधा नहीं जाएगा. इन प्रावधानों से एक के बाद एक विवाह के साथ ही हलाला और इद्दत जैसी कुप्रथाओं का अंत हो जाएगा.

मसौदे में असाधारण मामलों को छोड़कर किसी विवाहित जोड़े की शादी के एक साल से कम समय में तलाक के लिए अदालत का रुख करने पर रोक लगा दिया है. यदि किसी के भी तलाक की डिक्री पहले से ही पारित हो चुकी है, तो UCC पुनर्विवाह का अधिकार भी देता है.

लिव इन रिलेशनशिप पर ये है नए प्रावधान

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए युगल को रजिस्ट्रेशन करना होगा जिससे उनकी पहचान की जा सके. वहीं लड़की की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए और यदि लड़का और लड़की दोनों की उम्र 21 साल से कम हो तब दोनों को अपने परिवारवालों को इसकी जानकारी देनी होगी. सरकार का कहना है कि, इसके पीछे की वजह किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी स्पष्टता के साथ ही नैतिक मानदंडों को बचाएं रखने के लिए ऐसा किया गया है.

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वहीं लिव इन रिलेशनशिप को खत्म करने के लिए लड़का या लड़की किसी भी पक्ष को अपने साथी और स्थानीय रजिस्ट्रार को इसकी समाप्ति का बयान देना होगा.साथ ही एक बार जब एक साथी लिव इन रिलेशनशिप में समाप्ति का बयान रजिस्ट्रार को देता है, तो रजिस्ट्रार को ऐसे बयान के बारे में दूसरे साथी को सूचित करना होगा.

UCC बिल के मुताबिक इन नियमों का पालन नहीं करने पर छह महीने तक की जेल और 25000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है.

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