क्या अब कांग्रेस के सिंबल पर लड़ना पड़ जायेगा चुनाव? शरद पवार ने बुलाई समर्थकों की बैठक

अभिषेक गुप्ता

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Maharashtra Leader Sharad Pawar: महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार इन दिनों मुश्किलों में घिरे हुए हैं. पहले तो उनके ही भतीजे अजित पवार उन्हें दगा देकर कई विधायकों को लेकर बीजेपी के साथ सरकार में चले गए. पिछले दिनों चुनाव आयोग के एक फैसले से उनकी बनाई हुई पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) भी उनके हाथ से निकल कर अजित पवार के कब्जे में चली गई. अब आगामी चुनाव में उनके लिए पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है. खबर यह भी है कि शरद पवार के उम्मीदवार इस बार कांग्रेस के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ सकते हैं. इन्हीं सब बातों को लेकर पवार ने अपने समर्थक नेताओं की बैठक बुलाई है.

आपको बता दें कि शरद पवार ने साल 1999 में सोनिया गांधी का विरोध करते हुए कांग्रेस से अलग हुए थे और नई पार्टी NCP बनाई थी. अब ऐसी स्थिति बन रही है कि उन्हें फिर से कांग्रेस के सिंबल पर ही चुनाव लड़ना पड़ सकता है. आइए समझते है इस पूरे मामले को.

पहले वो मुद्दे जान लीजिए जिसपर चर्चा के लिए शरद पवार ने बुलाई है मीटिंग

अपनी ही पार्टी से हाथ धोने के बाद शरद पवार के लिए स्थिति बहुत पेचीदा हो गई है. कुछ ही दिनों में राज्यसभा सदस्यों के लिए चुनाव है. वहीं देश में लोकसभा के चुनाव भी होने हैं. ऐसे में शरद पवार के सामने कई ऐसे सियासी सवाल खड़े हुए हैं जिसपर चर्चा के लिए उन्होंने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई है. ये सवाल हैं…

1- सुप्रीम कोर्ट से पार्टी पर उनके दावे को लेकर राहत न मिलने पर क्या नई पार्टी बनाई जाए?
2- क्या NCP से अलग पहचान बनानी है?
3- राज्यसभा सदस्यों के चुनाव के लिए क्या रणनीति हो?
4- स्पीकर के फैसले के बाद अगली कार्रवाई क्या की जाए?

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NCP के हाथ से निकल जाने के बाद शरद पवार को नई पार्टी के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अगर उनकी नई पार्टी बन जाती है, तो इतने कम समय में पार्टी और चुनाव चिन्ह को मतदाताओं तक पहुंचाना काफी मुश्किल काम होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए क्या कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा जाए इसपर भी चर्चा होनी है.

1999 में पार्टी बनने के बाद से कैसा रहा है NCP का चुनावी प्रदर्शन?

शरद पवार 1999 में NCP बनाने के बाद से ही पार्टी के सर्वे-सर्वा रहे हैं. लेकिन अब भतीजे अजित पवार ने खेल कर पार्टी पर कब्जा कर लिया है. 1999 में नई-नई पार्टी बनने के बाद उसी साल हुए लोकसभा चुनाव में NCP ने आठ सीटें जीती थीं. फिर 2004 और 2009 के चुनाव में नौ-नौ सीटें मिलीं. उसके बाद देश में मोदी लहर आने के बाद पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट हुई. पार्टी 2014 में 6 तो वहीं 2019 के चुनाव में पांच सीटें जीतने में कामयाब हो पाई थी.

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महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में NCP के प्रदर्शन की बात करें, तो पार्टी ने 1999 में महाराष्ट्र की 288 सीटों में से 58 सीटें जीती थी. 2004 में 71, 2009 में 62, 2014 में 41 और 2019 में 54 सीटों पर कब्जा करने में सफल हुई थी.

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