सियासी ड्रामा: 91 विधायकों के इस्तीफे की थी चर्चा, सच आया सामने, सिर्फ इतने विधायकों ने दिया था रिजाइन
Rajasthan Political Drama: 25 सितंबर को राजस्थान में हुई सियासी हलचल के बाद कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे. अब करीब 4 माह बाद अध्यक्ष सीपी जोशी ने इस्तीफा सौंपने वाले विधायकों की संख्या 81 बताई है. अब सभी विधायकों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए हैं और इसे विधानसभा […]
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Rajasthan Political Drama: 25 सितंबर को राजस्थान में हुई सियासी हलचल के बाद कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे. अब करीब 4 माह बाद अध्यक्ष सीपी जोशी ने इस्तीफा सौंपने वाले विधायकों की संख्या 81 बताई है. अब सभी विधायकों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए हैं और इसे विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने स्वीकार कर लिया है, सोमवार को यह जानकारी हलफनामे के जरिए विधानसभा द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में दी गई है. महाधिवक्ता महेंद्र सिंह सिंघवी ने सोमवार को हाईकोर्ट में विधानसभा सचिन की ओर से हलफनामा पेश किया.
हाईकोर्ट में प्रस्तुत एक हलफनामे के अनुसार, विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा ने कहा है कि 25 सिंतबर को 81 विधायकों ने इस्तीफे सौंपे थे, जो पांच पेज के रूप में थे. यह 5 पेज की प्रतियां 6 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत की थी. सचिव ने हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ता का यह कहना सही नहीं है कि 91 इस्तीफे हुए हैं. हलफनामा विपक्ष के उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर द्वारा दायर जनहित याचिका के संबंध में पेश किया गया है, जिसमें राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और विधानसभा सचिव प्रतिवादी हैं.
कोर्ट में पेश किए गए अपने हलफनामे में विधानसभा सचिव ने यह भी कहा है कि सभी विधायक व्यक्तिगत रूप से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित हुए हैं और अपना इस्तीफा वापस लेने का पत्र प्रस्तुत किया है.
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राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया और संचालन के नियमों का हवाला देते हुए महावीर प्रसाद शर्मा ने कहा कि कोई भी विधायक इस्तीफा दे सकता है और नामंजूरी होने तक वह अपने इस्तीफा वापस भी ले सकता है. इसलिए इस्तीफे कानून की नजर में गैर-स्थायी हो गए.
हलफनामे में कहा गया कि स्पीकर ने 13 जनवरी 2023 को विधान सभा सदस्यों के इस्तीफे को खारिज कर दिया. इसलिए वर्तमान याचिका निरर्थक हो गई है. सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मणींद्र मोहन श्रीवास्तव और चंद्र कुमार सोंगारा की बेंच ने राठौड़ को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है और मामले को 20 जनवरी को जवाब पेश करने की तारीख दी गई है.
गौरतलब है कि दिसंबर में उपनेता प्रतिपश्र राजेन्द्र राठौड़ द्वारा दायर अपनी जनहित याचिका में तर्क दिया था कि राजस्थान के लोग भ्रम की स्थिति में हैं कि क्या वर्तमान में वे एक ऐसी सरकार द्वारा शासित हैं जो वैध रूप से स्थापित है या नहीं. उन्होंने याचिका में कहा था कि सरकार के 109 विधायकों में से 91 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. तो क्या अभी भी मौजूदा सरकार के पास बहुमत है? जनहित याचिका में मामले में न्यायिक हस्तक्षेप और सात कार्य दिवसों के भीतर इस्तीफे पर निर्णय लेने के लिए अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की गई थी.