अब टोल प्लाजा की लंबी लाइनों से मिलने जा रही है मुक्ति, 'मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम' से चलते-चलते कट जाएगा टोल!
कमलदीप
• 07:22 PM • 19 Jan 2026
Multi Lane Free Flow toll: टोल प्लाजा पर लंबी कतारों से जल्द राहत मिलने वाली है. हरियाणा के करनाल स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम लगाया गया है, जिससे बिना रुके टोल टैक्स कटेगा. जानिए कैसे काम करता है यह नया सिस्टम, इसकी खासियतें और देश में कहां-कहां होगी शुरुआत.
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अक्सर देखा जाता है कि टोल प्लाजा पर टैक्स कटवाने के लिए वाहन चालकों को लंबी-लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब इस समस्या का जल्द ही निपटारा होने वाला है क्योंकि अब गाड़ियों को टोल टैक्स देने के लिए रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे बिना किसी रुकावट के टोल पार कर सकेंगे.

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हरियाणा के करनाल स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. यहां अब 'मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम' को इंस्टॉल कर दिया गया है. यह आधुनिक सिस्टम जल्द ही शुरू किया जाएगा, जिससे नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों का समय बचेगा.
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इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका एडवांस सेंसर है. जानकारी के मुताबिक, यह मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम 50 मीटर की दूरी से ही वाहन को डिटेक्ट कर लेगा. जैसे ही वाहन टोल के करीब आएगा, सेंसर अपना काम शुरू कर देगा और बिना रुके प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. यानी की आपका टोल भी कट जाएगा और आपको कहीं रुकना भी नहीं पड़ेगा.

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यह सिस्टम न केवल टोल टैक्स की प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. इस टेक्नोलॉजी से गाड़ियों की स्पीड पर भी नजर रखेगी. इससे पता चल सकेगा कि कौन सी गाड़ी कितनी रफ्तार में टोल से गुजर रहा है, जो सुरक्षा के लिहाजे से जरूरी है.
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आपको बता दें भारत में इस आधुनिक सफर की शुरुआत फिलहाल दो जगहों से होने जा रही है. हरियाणा में करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा को इसके लिए चुना गया है, जबकि दूसरा सिस्टम गुजरात में शुरू होगा. इन दोनों जगहों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा.

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बसताड़ा टोल प्लाजा की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सिस्टम की इंस्टॉलेशन का काम पूरा हो चुका है. नेशनल हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब उन्हें टोल बूथ पर पैसे देने या टैग स्कैन कराने का इंतजार नहीं करना होगा.फिलहाल इस सिस्टम को तकनीकी रूप से तैयार किया जा रहा है और कुछ ही दिनों में इसकी शुरुआत धरातल पर हो जाएगी.
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