Eid-Ul-Fitr 2026 Date: 20 या 21 मार्च? कब मनाई जाएगी ईद, जानिए आपके राज्य में कब मनेगा जश्न और क्यों बदल जाती है तारीख
न्यूज तक डेस्क
• 11:02 AM • 20 Mar 2026
भारत में ईद-उल-फितर 2026 की तारीख चांद दिखने पर निर्भर है, जिसके चलते केरल और दक्षिण भारत में 20 मार्च को, जबकि दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में 21 मार्च को ईद मनाए जाने की संभावना है.
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रमजान के मुकद्दस महीने की इबादतों और रूहानी सुकून के बाद, अब हर किसी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं. भारत में मुस्लिम समुदाय ईद-उल-फितर के स्वागत की तैयारियों में डूबा हुआ है. बाजारों में रौनक है, घरों में पकवानों की खुशबू है, लेकिन एक सवाल जो हर साल की तरह इस बार भी सबकी ज़ुबान पर है- 'आखिर ईद किस दिन मनाई जाएगी?' दरअसल, ईद की खुशियां पूरी तरह से 'चांद' के दीदार पर टिकी होती हैं, जो हिजरी कैलेंडर का आधार है.


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आजतक की एक रिपोर्ट में इस्लामिक स्कॉलर एडवोकेट मुफ्ती उसामा नदवी बताते हैं कि ईद की तारीख को लेकर अक्सर एक पेच फंसा रहता है. अगर गुरुवार, 19 मार्च की शाम को आसमान में चांद नजर आ गया तो शुक्रवार, 20 मार्च को पूरे देश में ईद का जश्न मनाया जाएगा. यह संयोग होगा कि भारत और सऊदी अरब एक साथ ईद मनाएंगे. लेकिन अगर आज चांद ने बादलों की ओट में छिपना पसंद किया तो रमजान के 30 रोजे पूरे होंगे और फिर शनिवार, 21 मार्च को मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की जाएगी.
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दिलचस्प बात यह है कि भारत जैसे विशाल देश में ईद एक ही दिन नहीं मनाई जाती. मुफ्ती नदवी के अनुसार, इसके पीछे भौगोलिक स्थितियां और धार्मिक परंपराएं जिम्मेदार हैं. कुछ राज्यों में आज भी पुराने तरीके से आंखों से चांद देखने (रुय्यत-ए-हिलाल) की परंपरा है. चूंकि मौसम और बादलों की स्थिति हर जगह अलग होती है, इसलिए केरल में दिखने वाला चांद दिल्ली या बिहार के लोगों को नजर नहीं आता, जिससे तारीखों में एक दिन का अंतर आ जाता है.


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अगर हम राज्यों के हिसाब से संभावित तारीखों पर गौर करें, तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ईद 21 मार्च को मनाए जाने की प्रबल संभावना है. वहीं, भौगोलिक स्थिति के कारण केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में चांद जल्दी दिखने के आसार हैं, इसलिए वहां 20 मार्च को ही सेवइयों की मिठास घुल सकती है.
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इसी तरह राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में भी उम्मीद जताई जा रही है कि ईद का चांद 20 मार्च को ही नजर आ सकता है. इसके विपरीत, मध्य प्रदेश, ओडिशा और असम जैसे प्रदेशों में 21 मार्च की तारीख ईद के लिए तय मानी जा रही है. हालांकि, उलेमा और स्कॉलर्स का साफ कहना है कि ये सभी तारीखें केवल चांद दिखने के पुख्ता प्रमाण पर ही निर्भर करेंगी.


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अक्सर लोग पूछते हैं कि केरल में ईद बाकी भारत से एक दिन पहले क्यों होती है? मुफ्ती उसामा नदवी ने इसका तार्किक कारण बताया है. केरल की सीमा समुद्र से सटी है और वहां का आसमान अक्सर साफ रहता है, जिससे 'हिलाल' (नया चांद) वहां सबसे पहले दिखाई दे जाता है. उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में धूल या धुंध की वजह से उसी दिन चांद नहीं दिखता, इसीलिए दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग दिन ईद मनाना पूरी तरह जायज और सही है.
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चांद देखने की इस रस्म का सीधा संबंध धार्मिक मान्यताओं से है. हदीस के मुताबिक, "चांद देखकर रोजा रखो और चांद देखकर ही इफ्तार (ईद) करो." अगर चांद नजर न आए, तो महीने के 30 दिन पूरे करने का हुक्म है. यही वजह है कि इस्लामी महीना या तो 29 दिन का होता है या फिर 30 दिन का. इसमें बीच का कोई रास्ता नहीं है.


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मुफ्ती नदवी एक और अहम बात पर जोर देते हैं कि ईद की तारीख तय करने के लिए सिर्फ टीवी या इंटरनेट की खबरों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसके लिए 'शहादत' यानी भरोसेमंद गवाहों की जरूरत होती है. जब तक स्थानीय हिलाल कमेटियां चांद दिखने की पुष्टि नहीं कर देतीं, तब तक आधिकारिक घोषणा नहीं मानी जाती. सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय साक्ष्य को प्रधानता दी जाती है.


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ईद-उल-फितर दरअसल शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है. आज 19 मार्च की रात पूरी दुनिया के मुसलमान अपनी छतों पर खड़े होकर आसमान की ओर टकटकी लगाए होंगे. अगर आज चांद की महीन लकीर नजर आ गई, तो कल खुशियों का सवेरा होगा, वरना एक दिन का सब्र और करना होगा.


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ईद सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक अहसास है जो भाईचारे और प्यार का संदेश देता है. चाहे 20 मार्च हो या 21 मार्च, तैयारी पूरी है. आप भी अपने दोस्तों और परिवार के साथ इस खास मौके के लिए तैयार रहें. हमारी तरफ से आपको अग्रिम 'ईद मुबारक'!
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