प्राइवेट स्कूलों की बढ़ी फीस पर भाजपा सरकार की पोल खुली, विधानसभा में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि निजी स्कूलों की बढ़ी फीस वापस कराने को लेकर भाजपा सरकार के दावे झूठे साबित हुए हैं. विधानसभा के जवाबों से खुलासा हुआ कि न तो किसी स्कूल पर कार्रवाई हुई और न ही किसी अभिभावक को फीस वापस मिली.

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दिल्ली में निजी स्कूलों की बढ़ी हुई फीस को लेकर भाजपा सरकार के दावों की सच्चाई अब विधानसभा के जवाबों से सामने आ गई है. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार न तो एक भी स्कूल से फीस वापस करवा पाई और न ही किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई. यह खुलासा AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद के विधानसभा में दिए गए लिखित जवाबों के आधार पर किया.

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने खुद मान लिया है कि मनमाने तरीके से बढ़ाई गई फीस को किसी भी निजी स्कूल ने आज तक वापस नहीं किया. उन्होंने इसे भाजपा सरकार और निजी स्कूलों के बीच गहरी सांठगांठ का सबूत बताया.

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 से शुरू हुए शैक्षणिक सत्र में दिल्ली के लगभग सभी निजी स्कूलों ने 20 से 80 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी थी. इसके खिलाफ अभिभावकों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे. दबाव में आकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने स्कूलों के ऑडिट और फीस वापस कराने का वादा किया था लेकिन वह वादा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया.

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सरकार ने माना कि 1624 निजी स्कूलों का ऑडिट कराया गया

सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने माना कि 1624 निजी स्कूलों का ऑडिट कराया गया, लेकिन यह बताने में असमर्थ रही कि किन स्कूलों में गड़बड़ी या मुनाफाखोरी पाई गई. जब यह पूछा गया कि ऑडिट के आधार पर कितने स्कूलों पर नोटिस, जुर्माना या मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई हुई, तो सरकार का जवाब था, 'प्रक्रिया जारी है.' इसका सीधा मतलब है कि अब तक एक भी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

फीस बढ़ाने वाले स्कूलों की कोई सूची या रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं 

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि सरकार के पास अप्रैल 2025 में फीस बढ़ाने वाले स्कूलों की कोई सूची या रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है. यानी सरकार को यह तक नहीं पता कि किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई.

डीपीएस द्वारका का मामला भी चर्चा में रहा. सौरभ भारद्वाज ने बताया कि बढ़ी हुई फीस न देने पर छात्रों को लाइब्रेरी में बैठाने, मानसिक उत्पीड़न और स्कूल में बाउंसर तैनात करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे. डीएम की समिति ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई एफआईआर नहीं हुई. सरकार ने विधानसभा में कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जबकि सच्चाई यह है कि कोर्ट ने एफआईआर पर कोई रोक नहीं लगाई है.

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और डीएम की सिफारिशों के बावजूद शिक्षा विभाग डीपीएस द्वारका को बचाने में लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि ऑडिट, कार्रवाई और फीस वापसी की पूरी प्रक्रिया सिर्फ दिखावा साबित हुई है.

अंत में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार ने न तो अभिभावकों को राहत दी न ही छात्रों के हितों की रक्षा की. निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के बजाय सरकार उनके साथ खड़ी नजर आ रही है और इसका पर्दाफाश अब विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है.

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