राजधानी दिल्ली में बिजली हो सकती है महंगी? DERC में बदलाव के बीच तैयार हो रहा टैरिफ प्लान

Delhi electricity price hike: दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द झटका लग सकता है. DERC में बदलाव के बीच नई बिजली दरों को लेकर टैरिफ प्लान तैयार किया जा रहा है. डिस्कॉम्स का कहना है कि पिछले 10 सालों में लागत बढ़ी है लेकिन रेट नहीं बढ़े और जुलाई 2026-27 से पहले बिजली के दाम बढ़ सकते हैं. जानिए कब बदलेगा टैरिफ, क्या है प्रक्रिया और उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ेगा.

Delhi electricity price hike
दिल्ली में बिजली महंगी होने की चर्चाएं तेज
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आने वाले महीनों में बिजली के बिलों में बड़ा बदलाव हो सकता है. मिल रही जानकारी के मुताबिक दिल्ली बिजली नियामक आयोग यानी DERC जल्द ही नई बिजली दरों का ऐलान कर सकती है और इसके लिए प्लानिंग भी कर रही है. मौजूदा समय में DERC का अध्यक्ष पद खाली है लेकिन उनके सेलेक्शन की प्रक्रिया की शुरू होने के साथ ही नए टैरिफ की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है. बिजली की दरें आखिरी बार सितंबर 2021 में तय की गई है, वहीं मूल टेरिफ ढांचा साल 2014 से लगभग स्थिर बना हुआ है.

क्यों हो रहा बदलाव?

इस बदलाव के पीछे का कारण बताते हुए  बिजली वितरण कंपनियों यानी Discoms का कहना है कि तर्क है कि पिछले दस सालों में बिजली खरीदने की लागत 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है, फिर भी रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया. लेकिन कंपनियों के मुताबिक मौजूदा दरों पर काम करना अब आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया और अब वे चाहते है कि रेट में बदलाव हो ताकि उनका खर्च भी निकले और चीजें सही ढंग से चल पाएं.

कब तक बदल सकते हैं रेट?

अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि रेट में बदलाव कब तक होगा? तो एनबीटी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बिजनेस प्लान रेगुलेशन 2023 को पहले तीन साल के लिए बनाया गया था, लेकिन नए नियम फाइनल नहीं होने की वजह से एक और साल आगे बढ़ाया जाएगा. नियम बदलने के बाद Discoms को 2026-27 के लिए अपने टैरिफ आवेदन जमा करने के लिए भी कहा जाएगा. इन्हीं प्रक्रिया को देखते हुए जुलाई तक रेट में बदलाव हो सकता है.

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लोगों से मांगे गए सुझाव

मिली जानकारी के मुताबिक बदलाव के इस प्रस्ताव के लिए आयोग ने लोगों से सुझाव मांगे हैं. जनता इस प्रस्ताव पर 27 जनवरी की शाम 5:00 बजे तक अपने सुझाव और आपत्तियां भी दर्ज करा सकती है. एक्सपर्ट और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि टेरिफ में देरी उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में और भी महंगी साबित हो सकती है.

बिजली की दरें बढ़ाने का क्या है नियम?

बिजली की दरें सीधे नहीं बढ़ती. इसके लिए एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है. सबसे पहले सभी डिस्काउंट्स अपनी अनुमानित आय और खर्च का ब्यौरा डीईआरसी को सौंपेंगे. आयोग खर्चों की पुष्टि करेगा और देखेगा कि क्या पिछले घाटी की भरपाई जरूरी है. इसके बाद टैरिफ प्रस्ताव को सार्वजनिक किया जाएगा, जिस पर आम उपभोक्ता इंडस्ट्री ग्रुप और आरडब्ल्यूए अपनी राय देंगी. सभी पक्षों को सुनने के बाद ही डीईआरसी अंतिम टेरिफ ऑर्डर जारी करेगा. भले ही अभी डीईआरसी अध्यक्ष का पद खाली हो लेकिन डीईआरसी ने भविष्य की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है.

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