‘मुझे लगा कि पर्दा फाड़ दूं’ आदिपुरुष देखने के बाद मेकर्स पर जमकर बरसे ‘रामायण’ के लक्ष्मण

एमपी तक

MP News: फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब रामानंद सागर की रामायण में भगवान लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने फिल्म के ऊपर बड़ा बयान दिया है. आदिपुरुष फिल्म के बारे में बात करते हुए सुनील लहरी ने कहा कि उन्हें फिल्म बिल्कुल पसंद नहीं आई. […]

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MP News: फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब रामानंद सागर की रामायण में भगवान लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने फिल्म के ऊपर बड़ा बयान दिया है. आदिपुरुष फिल्म के बारे में बात करते हुए सुनील लहरी ने कहा कि उन्हें फिल्म बिल्कुल पसंद नहीं आई. उन्होंने फिल्म के डायलॉग और किरदारों के ऊपर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इन्हें चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.

रामानंद सागर की रामायण में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी मध्य प्रदेश के दमोह से आते हैं. उन्होंने फिल्म आदिपुरुष देखने के बाद फिल्म पर अपना रिएक्शन देते हुए ANI से बातचीत की. सुनील लहरी ने दुख जताते हुए कहा कि एक बार कांच टूट जाए तो वो दोबारा जुड़ सकता है. एक बार जो डैमेज हो गया वो हो गया, लेकिन इन्होंने ये डैमेज क्यों किया क्या सोचकर किया ये समझ में नहीं आता है.

टैटू बनाने से क्या मॉर्डन हो जाती है
सुनील लहरी ने फिल्म आदिपुरष देखने के बाद नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें फिल्म बिल्कुल पसंद नहीं आई, किसी भी एंगल से. सुनील लहरी ने कहा, “मुझसे ये पूछिए कि क्या पसंद आया, बजाय इसके कि क्या पसंद नहीं आया. सिर्फ दो चीजें मैं बोल सकता हूं. बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमेटोग्राफी पसंद आई. कैरेक्टराइजेशन से लेकर फिल्म के सीन तक इन सबका कोई सर पांव नहीं था. मुझे ये समझ नहीं आता ये क्यों बनाई. किसके लिए बनाई, किसको दिखाने के लिए बनाई. मुझे लगता है बच्चों से लेकर जो मॉर्डनिज्म की बात करते हैं वो. टैटू बनाने से मॉर्डन हो जाती है क्या. आज की जो हेयरस्टाइल है, विराट कोहली साहब करते हैं जो, तीन लाइन यहां खींचकर, ऐसी हेयरस्टाइल करने से फिल्म मॉर्डन हो जाती है क्या.

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सिर पीट रहे होंगे हनुमान जी
सुनील लहरी ने कहा, “एक कलाकार ही नहीं, बल्कि इस देश का नागरिक होने के नाते मैं अपनी संस्कृति का सम्मान करता हूं, फिल्म देखकर मुझे लगा कि मैं पर्दा फाड़ दूं. “मुझे लगता है कि जो सीट हनुमान जी की रखी है वो सारी सीटें देखकर हनुमान जी सिर पीटते होंगे कि किस तरह के डायलॉग बुलवा रहे हो मेरे कैरेक्टर से. क्या इन्हें बिल्कुल भी ख्याल नहीं कि किस तरह के डायलॉग उनसे बुलवा रहे हैं. मेघनाथ भी बहुत होशियार कैरेक्टर रहा है उससे कह रहे हैं अबे चल निकल ले. क्या बंबइया फुटपाथी लैंग्वेज बुलवा रहे हैं आप उससे. रावण जैसा ज्ञानी आदमी लौहा पीट रहा है, लौहार है क्या वो. कह रहा है तेरे बुआ के बगीचे में घूम रहा है. क्या है ये?”

क्या उल्टा-सीधा दिखा रहे हैं रामायण के नाम पर
सुनील लहरी ने कहा, “मुझे इस फिल्म से बहुत आशाएं थीं. मुझे लगा था कि जरूर लोग बात कर रहे हैं लेकिन कोई तो बात होगी इस मूवी में. मुझे प्रेस ने कॉन्टेक्ट करके बात करने की कोशिश की. मैंने सोचा कोई स्टेटमेंट नहीं दूंगा जब तक पिक्चर नहीं देखूंगा, लेकिन पिक्चर देने के बाद मुझे शर्म आई कि क्या रिएक्शन दूं. खैर मैं तो इस प्रोफेशन से हूं, लेकिन जो थिएटर में लोग बैठे हुए थे आसपास उनके रिएक्शन बहुत खराब थे. वे बहुत दुखी थे फिल्म के बारे में. एक लेडी कह रही थी कि चलो उठकर चलें, बाजू में बैठा आदमी अपने साथी से कह रहा था कि क्या उल्टा-सीधा दिखा रहे हैं रामायण के नाम पर. जबकि बहुत क्लीयर डिस्क्लेमर में लिखा हुआ था कि वाल्मीकि रामायण से प्रेरित होकर बना रहे हैं. ”

सुनील लहरी ने फिल्म में हनुमान जी के कैरेक्टर पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज भी हनुमान जी के किसी मंदिर में चले जाइए. यंगस्टर्स जाते हैं, टीका लगाते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. लोग हनुमान चालीसा जेब में लेकर जाते हैं. कितनी श्रद्धा है हनुमान जी के प्रति. मैं समझता हूं कि इन लोगों को चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए.

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