PM मोदी और जिनपिंग के बीच SCO समिट में क्या बातचीत हुई? चीन के राष्ट्रपति बोले- 'ड्रैगन-हाथी का साथ आना जरूरी'
SCO Summit 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन आज से चीन के तियानजिन में शुरू हो गया. यह दो दिवसीय सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा.
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SCO Summit 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन आज से चीन के तियानजिन में शुरू हो गया है. यह दो दिवसीय सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा. सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई सदस्य देशों के नेता तियानजिन पहुंचे हैं.
2018 के बाद पीएम मोदी का चीन दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त को तियानजिन पहुंचे. यह 2018 के बाद उनका पहला चीन दौरा है. चीन पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "एससीओ शिखर सम्मेलन और विभिन्न देशों के नेताओं से मुलाकात का इंतजार है." विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी समिट के दौरान कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे.
मोदी-शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक
रविवार को पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, "गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं." उन्होंने कहा - "पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही सार्थक चर्चा हुई जिसने हमारे संबंधों को सकारात्मक दिशा दी. सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है."
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पीएम मोदी ने बैठक में कहा, "हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा मिली है. सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बना है और कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है." उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होने की भी जानकारी दी. उन्होंने कहा, "हमारे सहयोग से 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हैं. हम संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
शी जिनपिंग ने क्या कहा?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, "चीन और भारत पूर्व की दो प्राचीन सभ्यताएं हैं. हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और हम ग्लोबल साउथ के भी महत्वपूर्ण सदस्य हैं. हम दोनों अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं. दोनों देशों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे मित्र बनें जिनके अच्छे पड़ोसी और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों और ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं."
उन्होंने कहा, "आज दुनिया सदी में एक बार होने वाले बदलावों से गुजर रही है. अंतर्राष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक दोनों है. इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है. दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता है. हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र लाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया और दुनिया भर में शांति और समृद्धि में अपना सच्चा योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को भी पूरा करना होगा"
वैश्विक चुनौतियों के बीच मुलाकात
दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण भारत के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं. जानकारों का कहना है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार को अमेरिका के साथ भारत के तनावपूर्ण रिश्तों से भी जोड़ा जा रहा है. पिछले साल भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 127.7 अरब डॉलर रहा था.
एससीओ का क्या महत्व है?
SCO शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मंच है. इस साल SCO सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और अन्य सदस्य देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे.