नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की छवि में कितना बदलाव आया? MOTN सर्वे ने चौंकाया
राहुल गांधी की छवि में हाल के वर्षों में बड़ा बदलाव आया है, जहां अब उन्हें एक मुखर, ज़िम्मेदार और भरोसेमंद विपक्षी नेता के रूप में देखा जा रहा है.
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राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा एक ऐसे नेता की कहानी बनती जा रही है जिसने आलोचनाओं को स्वीकार किया, गलतियों से सीखा और जमीन पर उतरकर जनता से दोबारा रिश्ता जोड़ा. फिर चाहे वो लोकसभा चुनाव से पहले की भारत जोड़ो यात्रा हो, विपक्ष के नेता की भूमिका हो या फिर बिहार की वोट अधिकार यात्रा.
राहुल गांधी की हर मुद्दों पर मुखरता लोगों का ध्यान खींच रही है. हालिया 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे इसी बात का संकेत है कि जनता उन्हें अब हल्के में नहीं ले रही.
ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई उनकी ये कोशिशें कामयाब हो पाई हैं, क्या राहुल गांधी की छवि में सुधार आया है. इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं
क्या कहती है देश की जनता
दरअसल हाल ही में इंडिया टुडे और सी-वोटर का नया 'मूड ऑफ द नेशन (MOTN)’ सर्वे सामने आया है. यह सर्वे 1 जुलाई 2025 से 14 अगस्त 2025 के बीच किया गया, जिसमें लोकसभा की सभी सीटों से 54 हजार 788 लोगों से राय ली गई.
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इसके साथ ही इसी सर्वे में C-Voter के नियमित ट्रैकर डेटा के 1 लाख 52 हजार 38 इंटरव्यू भी शामिल किए गए. यानी ये रिपोर्ट कुल 2 लाख 6 हजार 826 लोगों की राय पर तैयार की गई है.
इस सर्वे में शामिल लोगों के अनुसार भारत में राहुल गांधी को अब एक मजबूत और भरोसेमंद विपक्षी नेता के रूप में देखा जा रहा है.

इंडिया ब्लॉक का सबसे पसंदीदा चेहरा कौन
सर्वे में जब पूछा गया कि उनके हिसाब से विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का नेतृत्व किस करना चाहिए, तो इसके जवाब में 28% लोगों ने राहुल गांधी को अपनी पहली पसंद बताया.
इस लिस्ट में वैसे तो ममता बनर्जी (8%), अखिलेश यादव (7%) और अरविंद केजरीवाल (6%) का नाम शामिल है लेकिन इन तीनों नामों को प्रतिशत राहुल गांधी से काफी कम है. इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी अब विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभर रहे हैं.
नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी प्रदर्शन को सराहा गया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी का प्रदर्शन भी जनता द्वारा काफी सराहा गया है. सर्वे में शामिल 28% लोगों ने उनके काम को “बहुत अच्छा” और 22% ने “अच्छा” बताया है. यानी कुल मिलाकर 50% जनता उनके काम से संतुष्ट नजर आ रही है. वहीं 27% लोगो ऐसे भी हैं जिन्हें नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल का प्रदर्शन “खराब” या “बहुत खराब” लगा.
कांग्रेस के लिए भी राहुल सबसे उपयुक्त नेता
जब सवाल उठाया गया कि कांग्रेस का नेतृत्व कौन करे, तो सर्वे में शामिल 38% लोगों ने राहुल गांधी को सबसे उपयुक्त चेहरा माना है. वहीं गांधी परिवार से बाहर अगर देखा जाए, तो 16% लोगों ने सचिन पायलट को, 12% ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पसंद किया. हालांकि राहुल गांधी का समर्थन बाकी सभी चेहरों से काफी आगे रहा.

कांग्रेस की भी विपक्ष के रूप में छवि सुधरी
एक सवाल ये उठता है कि क्या कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर जनता का भरोसा मिला है. 27% लोगों ने कांग्रेस के काम को “बहुत अच्छा” और 20% ने “अच्छा” बताया.
यानी लगभग 47% लोग कांग्रेस के कामकाज से संतुष्ट हैं. इतना ही नहीं, 66% लोगों ने माना कि कांग्रेस ही असली विपक्षी पार्टी है.
इंडिया ब्लॉक पर भी लोगों का भरोसा बरकरार
वहीं सर्वे में 63 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इंडिया ब्लॉक जारी रहना चाहिए. जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 65% था, लेकिन यह गिरावट मामूली है. यह दिखाता है कि विपक्षी एकता में अब भी जनता की उम्मीदें बाकी हैं.
क्या राहुल गांधी की छवि बदली है?
इन सभी आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो साफ है कि राहुल गांधी की छवि में बीते कुछ महीनों में बड़ा सुधार आया है. जहां पहले उन्हें एक कमजोर नेता माना जाता था, उनके भाषणों के मीम हर सोशल प्लेटफॉर्म पर तैरते नजर आ जाते थे. वहीं अब उन्हें ना केवल कांग्रेस का बल्कि पूरे INDIA गठबंधन का सबसे मजबूत चेहरा माना जा रहा है.
जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है और उनके संसद में तेवर, खासतौर पर SIR और चुनावी धांधली जैसे मुद्दों पर मुखरता, उन्हें एक ज़िम्मेदार नेता के रूप में स्थापित कर रही है.

बीजेपी के लिए संकेत
हालांकि इस सर्वे के अनुसार देश की सबसे बड़ी पार्टी आज भी बीजेपी ही है लेकिन इस साल फरवरी में आए सर्वे की तुलना में सीटों में गिरावट आई है. फरवरी 2025 में जहां भारतीय जनता पार्टी को 281 सीटें मिलने का अनुमान था, वहीं अगस्त 2025 के सर्वे में यह संख्या घटकर 260 हो गई है.
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि राहुल गांधी अब मात्र एक विपक्षी नेता नहीं, बल्कि एक गंभीर, मुखर और लोकप्रिय नेता के रूप में सामने आ रहे हैं. उनके पक्ष में बढ़ती जनता की राय यह दिखाती है कि राजनीति में छवि बदलना मुमकिन है बशर्ते जनता को लगे कि नेता जनता के मुद्दों पर ईमानदारी से बोल रहा है.
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