लकी ड्रॉ से चुनाव हार गए कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, बराबर हैं वोट तो ऐसे निकलता है नतीजा 

अभिषेक गुप्ता

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Abhishek Manu Singhvi Congress:  बीते दिन हिमाचल में हुए राज्यसभा चुनाव में एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला. कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी और बीजेपी के हर्ष महाजन को 34-34 वोट यानी बराबर वोट मिले. कांग्रेस-बीजेपी के बीच मुकाबला टाई होने पर पर्ची से लकी ड्रॉ निकाला गया, जिसमें बीजेपी के हर्ष महाजन जीत गए. जबसे इस प्रक्रिया से जीत-हार का फैसला हुआ है तभी से लकी ड्रॉ के माध्यम से चुनाव में जीत-हार के इस तरीके पर खूब चर्चा हो रही है. सामान्य स्थिति में तो विजेता का फैसला हो जाता है लेकिन क्या होता है जब दो उम्मीदवारों को समान संख्या में वोट मिलते हैं यानी टाई होता है? तब विजेता का निर्णय कैसे होता है? आइए आपको बताते हैं आखिर दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला टाई होने पर क्या है नियम और क्या इससे पहले कभी ऐसा हुआ है? 

सिक्का उछालकर या लकी ड्रॉ से होगा विजेता का फैसला 

चुनाव में सामान्य स्थित में मतगणना के बाद जीते और हारे हुए उम्मीदवारों की घोषणा की जाती है क्योंकि जीतने और हारने वाले उम्मीदवारों के बीच वोटों का मार्जिन होता है. मामला तब फंसता है जब एक सीट पर दो या उससे अधिक उम्मीदवारों को एक बराबर वोट मिल जाएं. ऐसे मामले में विजेता की घोषणा सिक्का उछालकर या लकी ड्रॉ के माध्यम से कराने का प्रावधान है. 

भारत सरकार के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 102 के मुताबिक, यदि दो उम्मीदवारों के वोट एक बराबर होते हैं, तो विजेता का फैसला लॉटरी से किया जाएगा. एक्ट का यह खंड कहता है कि, एक बार किसी उम्मीदवार के पक्ष में लॉटरी निकलने के बाद अंतिम परिणाम विजेता के पक्ष में घोषित किया जाएगा क्योंकि ऐसा माना जाएगा कि लॉटरी जीतने वाले के पास एक अतिरिक्त वोट है. 

ऐसे ही निर्वाचन संचालन नियम, 1961 की धारा 75 के भाग चार के मुताबिक अगर दो उम्मीदवारों को एक समान वोट मिलते हैं तब चुनाव अधिकारी लॉटरी के माध्यम से विजेता की घोषणा कर सकता है. 

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पहले भी हो चुका है ऐसा

साल 2018 में असम में हुए पंचायत चुनाव के दौरान ऐसी छह सीटें थीं जहां उम्मीदवारों को एकसमान वोट मिले थे यानी इन सभी छह सीटों पर नतीजे टाई रहे थे. तब सिक्का उछालकर विजेता घोषित किया गया था. ऐसे ही दिसंबर 2017 में, मथुरा-वृंदावन नगर निगम के चुनाव में बीजेपी के एक उम्मीदवार को विजेता घोषित किया गया था. फरवरी 2017 में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव के दौरान भी ऐसा ही मामला देखने को मिला था. तब भी लॉटरी के के माध्यम से विजेता घोषित किया गया था.

हालांकि किसी भी विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में विजेता का फैसला पहले कभी नहीं किया गया था. राज्यसभा में इस तरीके से विजेता का फैसला करते हुए पहली बार देखा गया है.

 

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