1961 के बाद मणिपुर में जो आया उसे बाहर निकाला जाएगा? CM बीरेन सिंह के इस बयान का मतलब समझिए

अभिषेक गुप्ता

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Manipur News: मणिपुर में पिछले साल के अप्रैल से शुरू हुई जातिगत हिंसा छिट-पुट ढंग से अब तक जारी है. इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की खूब आलोचना हुई है. इन्हीं सब के बीच सीएम बीरेन सिंह ने एक बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने कहा है कि, साल 1961 के बाद जो भी लोग मणिपुर में आए और यहीं बस गए, ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें प्रदेश से निर्वासित यानी बाहर किया जाएगा. चाहे वो किसी भी जाति के ही क्यों न हों.

मुख्यमंत्री ने बीते सोमवार को इम्फाल पूर्व में आयोजित ‘प्रोजेक्ट बुनियाद- आत्मनिर्भरता का आधार’ के शुभारंभ के दौरान यह बयान दिया. इस मौके पर सीएम बीरेन सिंह ने कहा, ‘हमारी चिंता आपकी सुरक्षा है. हम मुसीबत से गुजर रहे हैं और अस्तित्व और पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं.’ सीएम के इस बयान की काफी चर्चा हो रही है. एक तरफ तो इसमे कई पेच बताए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ इसे मणिपुर के मूल निवासियों के लिए अच्छा कदम माना जा रहा है.

साल 1961 का क्या है गणित?

सवाल यह है कि सीएम बीरेन सिंह साल 1961 को बेसलाइन क्यों और कैसे मान रहे हैं. आपको बता दें कि देश के सीमावर्ती राज्यों में जाने और रहने के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) की व्यवस्था है. यानी यदि कोई भी व्यक्ति वहां जाता है और रुकता है, तो उसे ILP लेनी होती है. मणिपुर में वहां के मूल निवासियों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने साल 2019 में ILP को लागू करने का आदेश दिया था जो 2020 से लागू हो गया. साल 1961 मणिपुर में इनर लाइन परमिट के तहत आधार वर्ष का काम करता है. मणिपुर सरकार के मंत्रिमंडल ने जून, 2022 में राज्य के नागरिकों का स्थानीय दर्जा तय करने के लिए 1961 को मानक वर्ष बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. अब इसी आधार पर सीएम प्रदेश में आए प्रवासियों को बाहर निकालने की बात कर रहे हैं.

वैसे आपको बता दें कि इससे पहले सीएम बीरेन सिंह मणिपुर में महीनों तक जारी हिंसा के लिए ड्रग माफियाओं,अवैध प्रवासियों और खासकर प्रदेश में शरण लिए पड़ोसी देश म्यांमार के शरणार्थियों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. सीएम अपने इस नए बयान में अपने पहले के बयानों की पुष्टि करते हुए ऐसे अवैध लोगों को प्रदेश से बाहर निकालने की ही बात कर रहे हैं.

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