विधायक चिंतामणि महाराज भाजपा में शामिल, टिकट कटने पर कांग्रेस से हुए थे बागी
Chhattisgarh Elections 2023- टिकट कटने से नाराज चल रहे सामरी से कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज (Chintamani Maharaj) ने आखिरकार मंगलवार को भाजपा का दामन थाम…
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Chhattisgarh Elections 2023- टिकट कटने से नाराज चल रहे सामरी से कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज (Chintamani Maharaj) ने आखिरकार मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया. अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस मौके पर चिंतामणि महाराज ने कहा कि वे पहले भाजपा में ही थे. उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर भरोसा किया उन्होंने धोखा दिया इसलिए आज वे घर वापसी कर रहे हैं.
कांग्रेस ने सामरी से विधायक चिंतामणी महाराज का टिकट काटकर उनकी जगह विजय पैकरा को उम्मीदवार बनाया है. इसके बाद से वे लगातार भाजपा के संपर्क में थे. पहले चिंतामणि महाराज ने भाजपा में शामिल होने के लिए अंबिकापुर से उम्मीदवार बनाए जाने की शर्त रखी थी. हालांकि उन्होंने बताया था कि भाजपा उसे लोकसभा चुनाव में टिकट देने के लिए राजी है.
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पहले भाजपा में थे चिंतामणि महाराज
चिंतामणि महाराज रमन सरकार के पहले कार्यकाल में 2004 से 2008 तक राज्य संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष रहे. भाजपा से उपेक्षित होने पर उन्होंने 2008 में सामरी विधानसभा से ही निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन इसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी. महाराज लगभग 11 साल पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे. 2013 में उन्हें कांग्रेस ने लुंड्रा से टिकट दिया था और वे विधायक बने. फिर 2018 में उनको कांग्रेस ने सामरी से प्रत्याशी बनाया और वे दूसरी बार विधायक चुने गए. लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी नहीं बनाया.
उत्तर छत्तीसगढ़ में है प्रभाव
चिंतामणि महाराज प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता दिवंगत संत रामेश्वर गहिरा गुरु के पुत्र हैं, जिनका उत्तरी छत्तीसगढ़ में, विशेषकर आदिवासियों के बीच अपने कार्यों से काफी प्रभाव था. अब भी इनके अनुयायी अंबिकापुर, लुंड्रा, सामरी, जशपुर, कुनकुरी और पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्रों में हैं. अब देखना होगा कि भाजपा के लिए चिंतामणि कितना फायदेमंद साबित होते हैं.
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