मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपनों के बीच झेलना पड़ा भारी विरोध, दूषित पानी से मौत के बाद मुआवजे पर भड़के लोग

इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भारी विरोध. पीड़ितों ने मुआवजा लेने से किया इनकार. जानें क्या है मौतों के आंकड़ों का असली सच.

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मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में इन दिनों मातम के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है. दूषित पानी पीने की वजह से कई परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं. इसी बीच, इंदौर-1 से विधायक और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब मृतकों के परिजनों को मुआवजे का चेक बांटने पहुंचे, तो उन्हें भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा.

पीड़ितों ने जताया गुस्सा, मुआवजा लेने से किया इनकार 

भगीरथपुरा इलाके में मृतकों के परिजनों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुआवजा देने उनके घर पहुंचे. स्थानीय निवासियों और उर्मिला यादव के परिजनों ने स्पष्ट रूप से मुआवजे का चेक लेने से मना कर दिया और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किए. हालांकि, काफी मान-मनौव्वल और घर के भीतर बातचीत के बाद बताया गया कि परिजनों ने चेक स्वीकार कर लिया, लेकिन इलाके में तनाव और असंतोष साफ नजर आया.

आंकड़ों की बाजीगरी पर उठे सवाल 

इलाके में सबसे बड़ा विवाद मौतों के आंकड़ों को लेकर है. स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूषित पानी के कारण अब तक 10 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आधिकारिक तौर पर केवल 4 मौतों की पुष्टि की है, जबकि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनके पास 9 लोगों के मरने की जानकारी है. इस विसंगति के कारण सरकार और प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छुपाने के आरोप लग रहे हैं.

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मंत्री जी का 'फुर्र' होना और पार्षद की भूमिका 

विरोध के बीच एक और वाकया सामने आया जब दो महिलाओं ने मंत्री जी को रोककर उनके इलाके के नलों से आ रहे गंदे पानी को देखने की गुहार लगाई. लेकिन मंत्री जी के साथ मौजूद स्थानीय पार्षद कमल बघेला और बाइक चालक ने उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल ले जाने में ही भलाई समझी और मंत्री जी वहां से 'फुर्र' हो गए.

अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति 

कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि दूषित पानी के कारण अब तक लगभग 1400 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि जो लोग प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा चुके हैं, उनकी सूची बनाकर उन्हें भी भुगतान किया जाएगा. लेकिन स्थानीय लोग इसे केवल चुनावी मरहम मान रहे हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

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